Pilibhit News: यूपी में 4 साल में होने वाले राष्ट्रीय बाघ आकलन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसको लेकर 22 अगस्त को पहली बैठक होगी। आकलन के लिए देश को पांच भू-भागों में विभाजित किया गया है।
Pilibhit News: उत्तर प्रदेश में 4 साल में होने वाले राष्ट्रीय बाघ आकलन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा हर 4 साल में आयोजित किया जाने वाला यह आकलन 2026 के लिए निर्धारित है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक एच राजामोहन के मुताबिक, सर्वेक्षण की रणनीतियों पर चर्चा के लिए क्षेत्र निदेशकों, प्रभागीय वन अधिकारियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की पहली बैठक 22 अगस्त को भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) में होगी। आकलन के लिए देश को पांच भू-भागों में विभाजित किया गया है। इसमें शामिल है- शिवालिक पहाड़ियां और गंगा के मैदान, मध्य भारत के उच्चभूमि और पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट, उत्तर पूर्वी पहाड़ियां और ब्रह्मपुत्र के मैदान के साथ सुंदरवन जो 75,796 वर्ग किलोमीटर में फैले 53 बाघ अभयारण्यों को कवर करते हैं।
उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड शिवालिक पहाड़ियों और गंगा के मैदान भू-भाग के अंतर्गत आते हैं। पिछले अनुमान (2022) में, भारत में 3,682 बाघों की संख्या दर्ज की गई थी। जो 2018 की तुलना में 715 अधिक है। मध्य प्रदेश 785 बाघों के साथ सबसे आगे था, उसके बाद कर्नाटक 563 और उत्तराखंड 560 बाघों के साथ दूसरे स्थान पर था। उत्तर प्रदेश में 205 बाघ दर्ज किए गए। जुलाई 2023 में जारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को सबसे अधिक 260 बाघों वाला बताया गया था।
दुधवा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक एच राजामोहन के मुताबिक यूपी, उत्तराखंड और राजस्थान के वन अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण 1 से 3 सितंबर तक पीलीभीत टाइगर रिजर्व में आयोजित किया जाएगा। दुधवा टाइगर रिजर्व में आकलन 2,200 वर्ग किलोमीटर को कवर करेगा, जिसमें कतर्नियाघाट और किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य, दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, उत्तर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग और शाहजहांपुर वन प्रभाग शामिल हैं।