राजनीति

महाराष्‍ट्र: 30 हजार अन्‍नदाता एक बार फिर सड़कों पर उतरे, आज विधानसभा के बाहर करेंगे प्रदर्शन

साल 2018 में दूसरी बार महाराष्‍ट्र के हजारों किसान सड़क पर उतर आए हैं। किसान अपनी मांगों को लेकर ठाणे से मुंबई तक मार्च निकालने के बाद विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करेंगे।
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Updated: 22 Nov 2018, 10:57 AM IST
farmers march
महाराष्‍ट्र: 30 हजार अन्‍नदाता एक बार फिर सड़कों पर उतरे, विधानसभा के बाहर करेंगे प्रदर्शन

नई दिल्‍ली। एक बार फिर महाराष्‍ट्र में किसान आंदोलन उग्र रूप धारण करता जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर 30 हजार किसान सड़क पर उतर आए हैं। ठाणे से चलकर भारी संख्‍या में किसान आज मुंबई में विधानभवन के पास प्रदर्शन करने वाले हैं। बता दें कि आठ महीने पहले भी असंतुष्‍ट किसानों ने मुंबई की सड़कों पर जनजीवन को ठप्‍प कर दिया था। किसानों के उग्र रूप से घबराई फड़णवीस की सरकार ने उस समय कर्जमाफी की घोषणा की थी। उसके बाद किसानों ने अपना अंदोलन वापस ले लिया था।

जलपुरुष भी मार्च में शामिल
मार्च की शुरुअता बुधवार को ठाणे से हुई थी। मार्च में शामिल किसान आज मुंबई पहुंचेंगे। यहां विधानसभा भवन के बार किसान प्रदर्शन करेंगे। मार्च को सफल बनाने के लिए किसान और आदिवासी अपने खाने-पीने का सामान भी साथ लेकर चल रहे हैं। आठ महीने पहले किसानों ने नासिक से ऐसा ही मार्च निकाला था। मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित और भारत के जल पुरुष के डॉ. राजेन्द्र सिंह भी मार्च करने वालों में शामिल हैं।

सरकार समस्‍याओं को लेकर गंभीर नहीं
मार्च में शामिल एक नेता ने बताया कि हम लोग गुरुवार सुबह में दक्षिण मुंबई में आजाद मैदान पहुंचेंगे और फिर वे विधानभवन के पास प्रदर्शन करेंगे। अभी राज्य विधानसभा का सत्र चल रहा है। मार्च में हिस्सा लेने वालों में अधिकतर लोग ठाणे, भुसावल और मराठवाड़ा क्षेत्रों से हैं। किसान मार्च का नेतृत्‍व कर रहे लोक संघर्ष मोर्चे की महासचिव प्रतिभा शिंदे ने कहा है कि हमने राज्य सरकार से लगातार कहा है कि वे लंबे समय से चली आ रही हमारी मांगों को पूरा करे लेकिन प्रतिक्रिया उदासीन रही है। हम लोग इस बात का अधिक से अधिक ख्याल रख रहे हैं कि मुंबई के लोगों को कोई परेशानी नहीं हो। सरकार को चाहिए किसानों की समस्‍याओं को प्रभावी तरीके से निराकरण करे।

किसानों की मांगें
1. न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और इसे लागू करने के लिए न्यायिक तंत्र का गठन हो।
2. स्वामीनाथन रिपोर्ट के मुताबिक जमीन और पानी जैसे संसाधनों तक किसानों की निश्चित रूप से पहुंच और नियंत्रण होना चाहिए।
3. भाजपा सरकार द्वारा पिछले साल घोषित कर्ज माफी पैकेज प्रभावी तरीके से लागू हो। भूमि पर किसानों का अधिकार हो और खेतिहर मजदूरों को भी मुआवजा मिले।

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22 Nov 2018, 10:57 AM IST
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