गौरतलब है कि सत्ता से बाहर होने पर कांग्रेस पार्टी के चंदे में कमी आई है। ऐसे में पटेल के सामने सत्ता से बाहर रहते हुए पार्टी के खजाने में इजाफा कराने की बड़ी चुनौती होगी।
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लगातार अपनी टीम में फेरबदल कर मजबूत करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को पार्टी का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव रहे पटेल, पूर्व कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा का स्थान लेंगे। वोरा को महासचिव (प्रशासन) बनाया गया है। सबसे बड़ा सवाल है कि पिछले कुछ समय से अहम पटले राहुल गांधी की टीम से बाहर चल रहे थे। लेकिन फिर उन्हें कैसे पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। सूत्रों के मुताबिक अहमद पटेल गांधी परिवार के पुराने और विश्वासपात्र नेता हैं। अहमद पटेल को स्वर्गीय राजीव गांधी का करीबी माना जाता था। बताया जाता है कि राजीव गांधी ही उन्हें राजनीति में लेकर आए थे। इसी को देखते हुए अहमद पटेल सोनिया गांधी के राजनीति सलाहकार भी बने। यूपीए सरकार में अहमद पटेल का स्थान बड़ा था।
सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस की आर्थिक स्थिति कमजोर
गौरतलब है कि कांग्रेस के हाथों से सत्ता निकल जाने के बाद से लगातार पार्टी के चंदे में कमी आई है। ऐसे में पटेल के सामने सत्ता से बाहर रहते हुए पार्टी के खजाने में इजाफा कराने की बड़ी चुनौती होगी। सूत्रों के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यूपीए सरकार के दौरान राजीव गांधी फाउन्डेशन को बजट से 20 करोड़ रुपए का फंड दिलाया था। लेकिन सोनिया गांधी ने इसे अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद अहमद पटेल के कंधों पर राजीव गांधी फ़ाउन्डेशन के लिए फंड इकट्ठा करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसे उन्होंने बाखूबी तरीके निभाया था
कई अन्य नेताओं को भी मिली जिम्मेदारी
गोवा कांग्रेस के पूर्व प्रमुख लुइजिन्हो फलेरिओ को पूर्वोत्तर राज्यों का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया है, जबकि लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को कांग्रेस कार्यसमिति का स्थायी विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। फलेरिओ, सी.पी. जोशी का स्थान लेंगे। आनंद शर्मा पार्टी के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह की जगह लेंगे।
कार्यकारिणी सदस्य से बाहर
बता दें कि हाल ही में कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से ठीक पहले जनार्दन द्विवेदी, दिग्विजय सिंह सुशील शिंदे समेत कई वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारिणी सदस्य से बाहर कर दिया गया था