राजनीति

भाजपा-कांग्रेस दोनों के लिए करो या मरो की लड़ाई, लोकसभा चुनाव 2019 पर दिखेगा असर

लोकसभा चुनाव 2019 की राह आसान करने के लिए मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान तीनों राज्यों पर कब्जा जमाना भाजपा-कांग्रेस का लक्ष्य।
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भाजपा-कांग्रेस दोनों के लिए करो या मरो की लड़ाई, लोकसभा चुनाव 2019 पर दिखेगा असर

नई दिल्ली। इस बार का विधानसभा चुनाव पहले के चुनावों के मुकाबले में काफी अहम है। क्योंकि इन चुनावों को लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। दरअसल जो भी राजनीतिक दल इन विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करेगा उनको 2019के लोकसभा चुनाव में सीधा फायदा मिलेगा। पांच राज्यों (मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना) के विधानसभा चुनाव में तीन राज्य की फैक्टर हैं। इन तीन राज्यों (एमपी, सीजी औ राजस्थान) पर जिस पार्टी ने कब्जा जमा लिया उन्हें लोकसभा फतह करने में आसानी होगी। इसके साथ ही पार्टी के कार्यकर्ताओं नेताओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जो लोकसभा चुनाव की राह को आसान बनाएगा। आइए समझते हैं इन तीन राज्यों में राजनीतिक दलों का गणित...

राजस्थान (कुल विधानसभा सीट 200)
राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं। इनमें 142 सीट सामान्य, 33 सीट अनुसूचित जाति और 25 सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और वसुंधरा राजे सीएम बनी थीं। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी 25 सीटों पर कब्ज़ा किया था। लेकिन दिसंबर 2017 में राज्य के निकाय उपचुनावों में ज्यादातर सीटें जीतकर कांग्रेस ने बीजेपी के माथे पर बल ला दिए हैं। सूबे में कांग्रेस की स्थिति फिर से मजबूत करने में जुटे सचिन पायलट इस बार वसुंधरा राजे को कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
प्रमुख चेहरेः वसुंधरा राजे सिंधिया (मौजूदा सीएम,भाजपा), अशोक गहलोत (पूर्व सीएम,कांग्रेस), सचिन पायलट (कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष)

मध्यप्रदेश (कुल विधानसभा सीट 230)
मध्यप्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं। भाजपा ने 165 सीटें जीती थी। जबिक कांग्रेस को 58 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। बसपा के चार प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। वहीं सपा और भारतीय जन शक्ति पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल सकी थी। यही नहीं तीन निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। इस चुनाव में 25 महिला प्रत्याशियों ने भी जीत दर्ज की थी। शिवराज सिंह चौरान यहां तीन बार से चुनाव जीतते आ रहे हैं। हालांकि इस बार एंटी इन्कमबेंसी उनके लिए खतरा बढ़ा रही है, लेकिन मयावती के कांग्रेस से समर्थन वापस लेने से उनको नई उम्मीद जगी है।
प्रमुख चेहरेः शिवराज सिंह चौहान (मौजूदा सीएम, भाजपा), ज्योतिरादित्य सिंधिया(कांग्रेस), कमलनाथ (कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष)

छत्तीसगढ़ (कुल विधानसभा सीट 90)
छत्तीसगढ़ विधानस चुनाव में कुल 90 सीटें हैं। यहां भाजपा ने 49 सीटों पर कब्जा जमाकर जीत हांसिल की थी, हालांकि कांग्रेस ने भी भाजपा को जमकर टक्कर दी और 39 सीटें अपने नाम करने में कामयाब रही। विधानसभा में 39 सीटें अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है। इस चुनाव में आरक्षित सीटों की बात करें तो बसपा व जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। क्योंकि जकांछ के पास एक भी सीट नहीं है और बसपा की एकमात्र सीट जैजेपुर अनारक्षित वर्ग की है। आपको बता दें कि यहां बसपा ने अजीत जोगी के नेतृत्व वाली जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ से गठबंधन किया है। जो कांग्रेस और सत्ताधारी भाजपा दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
प्रमुख चेहरेः रमन (मौजूदा सीएम,भाजपा), भूपेश बघेल (कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष),अजीत जोगी (जनता कांग्रेस छ.)

तीन राज्यों में लोकसभा सीटें
मध्यप्रदेश - 29
छत्तीसगढ़ - 11
राजस्थान - 25
तीनों राज्यों में कुल 65 लोकसभा सीटें हैं यानी होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की कुल 83 सीटों में से 65 सीटें इन तीन राज्यों पर टिकी हैं। जाहिर भाजपा-कांग्रेस दोनों ही चाहेंगी कि सीटों का ये जखीरा उनके हाथ लगे ताकि लोकसभा चुनाव 2019 को फतह किया जा सके।

Published on:
06 Oct 2018 01:16 pm