एलजेपी के फैसले के बाद बीजेपी सीईसी की बैठक हुई। सीईसी की बैठक में पीएम मोदी और अमित शाह शामिल हुए। एलजेपी के एक्शन से बीजेपी का काम आसान।
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 ( Bihar Election 2020 ) में लोक जनशक्ति पार्टी द्वारा जेडीयू से अलग होकर चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ ही एनडीए में सीट शेयरिंग का सस्पेंस भी समाप्त हो गया है। एलजेपी के इस फैसले के बाद दिल्ली में बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति ( CEC ) की बैठक रविवार को हुई। बैठक में बीजेपी प्रत्याशियों के नामों को लेकर चर्चा हुई। सीईसी की बैठक के बाद इस बात के संकेत मिले हैं कि बीजेपी सोमवार को अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर सकती है।
सीईसी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, शहनवाज हुसैन और भूपेंद्र यादव मौजूद शामिल हुए। आज बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा बीजेपी उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर सकते हैं।
बता दें कि भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक से कुछ देर पहले ही लोक जनशक्ति पार्टी की केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने यह फैसला लिया था कि एलजेपी बिहार चुनाव में जेडीयू के साथ चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। लोजपा ने इसके पीछे कारण वैचारिक मतभेद बताया है।
बिहार पहले, बिहारी पहले पर नहीं बनी सहमति
इसके बाद लोजपा के प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर व लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी का भाजपा के साथ मजबूत गठबंधन है लेकिन राज्य स्तर पर व विधानसभा चुनाव में गठबंधन में मौजूद जदयू से वैचारिक मतभेदों के कारण बिहार में लोजपा ने गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने का फैसला लिया है।
एलजेपी के प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक ने कहा कि कई सीटों पर जेडीयू के साथ वैचारिक लड़ाई हो सकती है। ताकि उन सीटों पर जनता निर्णय कर सके कौन सा प्रत्याशी प्रदेश के हित में बेहतर है। उन्होंने कहा कि लोजपा ‘बिहार पहले बिहारी पहले’ दृष्टिपत्र को लागू करना चाहती थी जिस पर समय रहते सहमति नहीं बन पाई। लोजपा ने गत दो अक्टूबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय योजना को भ्रष्टाचार का पिटारा होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इस योजना के सभी कार्य अधूरे रह गए।
एनडीए का हिस्सा बनी रहेगी बीजेपी
एलजेपी की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि बिहार में जेडीयू के खिलाफ पार्टी खुद का प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। इसके बावजूद एलजेपी एनडीए का हिस्सा बनी रहेगी।