राजनीति

Bihar Election : बीजेपी नेतृत्व ने जारी की चेतावनी, बागी नेता नाम वापस लें, वरना निष्कासन तय

  इस बार बीजेपी के दो दर्जन से ज्यादा कद्दावर नेता हो सकते हैं बागी। टिकट मिलने पर बागी नेताओं में से ज्यादातर एलजेपी में शामिल। आलाकमान ने बागी नेताओं को पार्टी से 6 साल के निष्कासन की चेतावनी दी।

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इस बार बीजेपी के दो दर्जन से ज्यादा कद्दावर नेता हो सकते हैं बागी।

नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव ( bihar assembly election ) लड़ने के लिए टिकट न मिलने से नाराज बागियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बीजेपी ( BJP ) हाईकमान ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने बागी नेताओं से साफ कर दिया है कि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ अपना नामांकन वापस ले लें। पार्टी ने नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर तय कर दी है।

भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ नाम वापस न लेने पर बागियों को 6 साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने की चेतावनी दी है।

2 दर्जन नेता बागी

जानकारी के मुताबिक पार्टी में बागियों का सिलसिला यही थमने का नाम नहीं ले रहा है। नेताओं की मानें तो तीन चरण में हो रहे बिहार चुनाव का नामांकन खत्म होने तक कम से कम दो दर्जन जाने-पहचाने चेहरा बीजेपी से बागी हो सकते हैं।

बागियों में से अधिकांश एलजेपी में शामिल

बीजेपी से बागी होने वाले नेताओं में सबसे चर्चित चेहरा राजेंद्र सिंह व रामेश्वर चौरसिया हैं। एक दौर में रामेश्वर चौरसिया पार्टी के फायरब्रांड नेता थे। प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा करते थे। लेकिन नोखा सीट जैसे ही जेडीयू खाते में गई वह पार्टी छोड़कर एलजेपी के टिकट पर सासाराम से चुनावी मैदान में उतर गए। 2015 में पार्टी के सीएम फेस के रूप में चर्चा में आए राजेंद्र सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष थे। दिनारा सीट जेडीयू कोटे में चली गई तो वे भी बिना देरी किए बीजेपी से नाता तोड़ लिया और एलजेपी के उम्मीदवार बन गए। इसी तरह पालीगंज विधायक रहीं उषा विद्यार्थी, बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश प्रवक्ता रहीं श्वेता सिंह, जहानाबाद से बीजेपी कार्यसमिति की सदस्य इंदू कश्यप, घोसी से राकेश कुमार सिंह, अमरपुर से मृणाल शेखर लोजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं।

पटेल का बागी होने से इनकार

दूसरी तरफ बीजेपी में कुछ ऐसे भी नेता हैं जो दूसरे दलों के ऑफर को साफ नकार दे रहे हैं। सूर्यगढ़ा से 4 बार चुनावी मैदान में उतर कर 3 बार जीत हासिल करने वाले प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल को भी लोजपा की ओर से टिकट का ऑफर मिला था लेकिन उन्होंने प्रदेश नेतृत्व के प्रति आस्था जताते हुए भाजपा में ही रहना स्वीकार किया।

Bihar Election : 2015 में जिन सीटों पर हारी थी बीजेपी, वीआईपी को मिली उन्हीं को जीतने की चुनौती

बता दें कि 2015 के चुनावी मैदान में बीजेपी 157 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इसका मूल कारण था कि एनडीए में वह पिछली बार सबसे बड़ी पार्टी थी। लेकिन इस बार एनडीए में जेडीयू के आने पर वह बड़ी पार्टी बन चुकी है। जेडीयू 115 तो बीजेपी 110 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ऐसे में पिछली बार की तुलना में इस बार पार्टी 47 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ पाएगी। यही वजह है कि इस बार पार्टी से नारजा नेताओं की संख्या काफी है।

Updated on:
10 Oct 2020 05:00 pm
Published on:
10 Oct 2020 04:10 pm
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