राजनीति

बिहार: बन रहा है नया सियासी समीकरण, बसपा और सीपीआई-एमएल के साथ महागठबंधन की कोशिश में आरजेडी

लोकसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) बिहार में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और सीपीआईएमएल को जोड़ने पर विचार कर रही है।
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Updated: 19 Jun 2018, 5:55 PM IST
लालू प्रसाद यादव और मायावती
बिहार: बन रहा है नया सियासी समीकरण, बसपा और सीपीआई-एमएल के साथ महागठबंधन की कोशिश में आरजेडी

पटना। आगमी आम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है वैसे-वैसे देश में नए-नए राजनीतिक समीकरण बनती और बिगड़ती जा रही हैं। जहां मंगलवार को जम्मू-कश्मीर की सियासत में भूचाल आया और भाजपा ने पीडीपी गठबंधन से अपना समर्थन वापस ले लिया। वहीं दूसरी और बिहार में भी राजनीतिक समीकरण बदलने के आसार नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने अब बिहार में एक नए महागठबंधन की संभावना तलाशनी शुरु कर दी है। लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी राज्य में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और सीपीआईएमएल को जोड़ने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बसपा और सीपीआईएमएल के साथ आने पर दलित और गैर यादव ओबीसी वोट महागठबंधन की ओर आकर्षित होंगे।

सीटों के सही बंटवारे पर आएंगे साथ: मायावती

आपको बता दें कि लालू यादव ने अगस्त 2017 में पटना में आयोजित 'भाजपा भगाओ देश बचाओ’ रैली के जरिए गैर एनडीए दलों को साथ लाने का प्रयास किया था। लेकिन उस वक्त बसपा सुप्रीमो मायावती ने लालू के निमंत्रण को ठुकराते हुए कहा था कि जब तक आगामी आम चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे और महागठबंधन का प्रारुप तय नहीं हो जाता है, तब तक बसपा किसी के साथ मंच साझा नहीं करेगी। आपको बता दें कि कुछ ही दिन पहले मायावती ने जोर देते हुए कहा था कि बसपा किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन तभी करेगी जब उसे सम्मानित संख्या में सीटें दी जाएगी, अन्यथा वह चुनाव अकेले लड़ेगी। बता दें कि यूपी में दो लोकसभा उपचुनावों के लिए बसपा-सपा गठबंधन ने जीत दर्ज की थी जिसके बाद से सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा था कि आम चुनाव में गठबंधन को बनाए रखने के लिए वह किसी भी तरह के बलिदान के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि अभी बिहार में किसी भी तरह से महागठबंधन की पुष्टि नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि आरजेडी के एक नेता के मुताबिक बिहार में बसपा के साथ सीट साझेदारी का समझौता हो जाएगा और यूपी-बिहार के बॉर्डर की कम से कम 6 सीटों पर इस महागठबंधन का अच्छा असर पडेगा।

बिहार में 2014 आम चुनाव में बसपा अकेले लड़ी थी

आपको बता दें कि 2014 के आम चुनाव में बसपा अकेले चुनाव लड़ी थी और 7.65 लाख वोट हासिल की थी, जो कि 2015 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 7.88 लाख हो गया। हालांकि लोकसभा और विधानसभा में एक भी सीट जीतने में बसपा कामयाब नहीं रही। बता दें कि इन सब घटनाकर्मों के बीच एनडीए से अलग हुए बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा ने पहले से ही महागठबंधन को अपना समर्थन देने का ऐलान कर दिया है।

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