राजनीति

बिम्‍सटेक समिट: दो दिन के दौरे पर नेपाल पहुंचे पीएम मोदी, एक्‍ट ईस्‍ट पॉलिसी पर देंगे जोर

21 वर्ष पूर्व इस संगठन का गठन हुआ था। काठमांडू में बिम्‍सटेक का यह चौथा सम्मेलन है।
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बिम्‍सटेक समिट: दो दिन के नेपाल दौरे पर रवाना हुए पीएम मोदी, एक्‍ट ईस्‍ट पॉलिसी देंगे जोर

नई दिल्‍ली। बंगाल की खाड़ी शांति, खुशहाली और स्थायित्व की ओर विषय पर काठमांडू में आयोजित बिम्‍सटेक सदस्‍यों देशों के शिखर सम्‍मेलन में शिरकत करने के लिए पीएम मोदी नेपाल पहुंच गए हैं। सम्‍मेलन के दौरान वो एक्‍ट ईस्‍ट पालिसी पर जोर देंगे। समिट से इतर सदस्‍य देशों के शासनाध्‍यक्षों से मिलकर आपसी मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।

राष्‍ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मिलेंगे
नेपाल पहुंचने के बाद पीएम मोदी कार्यक्रम की शुरुआत में बिम्सटेक के नेताओं के साथ संयुक्त रूप से सम्मेलन के आयोजक नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मुलाकात करेंगे। इसके बाद सम्मेलन का पूर्ण उद्घाटन सत्र का आयोजन होगा। सम्मेलन का समापन 31 अगस्त होगा। सम्मेलन के बाद संयुक्त घोषणा पत्र भी जारी किया जाएगा। बैंकॉक के घोषणा पत्र के माध्यम से छह जून 1997 को बिम्सटेक अस्तित्व में आया।

बिम्‍सटेक के सात देश
क्षेत्रीय हितों के संवर्द्धन को लेकर गठित इस अंतरराष्‍ट्रीय संगठन में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में बसे सात देश-बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाइलैंड शामिल हैं। समूह में शामिल सात देशों की आबादी 1.5 अरब है। यह दुनिया की आबादी का 21 फीसदी है और इस समूह का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2500 अरब डॉलर है।

मकसद
बिम्सटेक के गठन का मुख्य उद्देश्य बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में स्थित दक्षिण एशियाई और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच तकनीकी और आर्थिक सहयोग स्थापित करना है। साथ ही आपसी हितों के साथ रणनीतिक हितों के विषयों पर भी एक-दूसरे के साथ सहयोग करना शामिल है।

भारत के लिए अहम क्‍यों?
बिम्‍सटेक की अहमियत वर्तमान वर्ल्‍ड ऑर्डर में भारत के लिए बहुत ज्‍यादा है। यही वजह है कि इन देशों के साथ बेहतर संबंधों की शुरुआत पूर्व पीएम नरसिम्‍हा राव ने की थी। यह प्रयास अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्‍व काल में भी जारी है। डॉ. मनमोहन सिंह भी इस ओर काफी ध्‍यान दिया। अब पीएम मोदी अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी और नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी को लेकर बिम्सटेक देशों से मजबूत संबंधों को लेकर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि भारत के लिए यह अवसर काफी महत्वपूर्ण है। गोवा में बिस्मटेक सम्मेलन का आयोजन होने के दो साल बाद काठमांडु में आयोजित होने वाले सम्मेलन में समूह के सदस्य देशों के नेता मिलेंगे और आपसी हितों पर चर्चा करेंगे।

Published on:
30 Aug 2018 09:02 am