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‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ की नीति से तीन साल में नशे के काले कारोबार पर करो प्रहारः शाह

केन्द्रीय गृह अमित शाह ने नशे के खिलाफ सभी एजेंसियों को तीन साल में प्रभावी परिणाम दिखाने को कहा है। उन्होंने नार्को-को ऑर्डिनेशन सेंटर (एनकोर्ड)की 10वीं बैठक में मादक पदार्थ नियंत्रण पर अगले तीन साल का विजन डॉक्यूमेंट जारी करते हुए कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई में यह 3 साल तय करेंगे कि नशा हम पर विजय प्राप्त करेगा या हम नशे पर विजय प्राप्त करेंगे
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Narcotics

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह अमित शाह ने नशे के खिलाफ सभी एजेंसियों को तीन साल में प्रभावी परिणाम दिखाने को कहा है। उन्होंने नार्को-को ऑर्डिनेशन सेंटर (एनकोर्ड)की 10वीं बैठक में मादक पदार्थ नियंत्रण पर अगले तीन साल का विजन डॉक्यूमेंट जारी करते हुए कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई में यह 3 साल तय करेंगे कि नशा हम पर विजय प्राप्त करेगा या हम नशे पर विजय प्राप्त करेंगे।

नार्को टेररिज्म इकोसिस्टम बन रहा चुनौती

शाह ने कहा कि ड्रग तस्करी, संगठित अपराध, नार्को टेरर फाइनेंस और सीमापार के आतंकी नेटवर्क के साथ यह समस्या एक इवोल्विंग नार्को टेररिज्म इकोसिस्टम भी बन चुकी है। भारत डेथ ट्राइंएगल और डेथ क्रिसेंट के बीच में स्थित हैं और ड्रोन-आधारित ड्रॉप्स, समुद्री मार्गों से कंटेनराइज्ड कार्गो, डार्कनेट, क्रिप्टो पेमेंट, ऑर्डर टू डिलीवरी मॉडल, पार्सल के जरिए ड्रग का कारोबार इस लड़ाई को कठिन बना देता है। नशे के अपराधी टेक्नोलॉजी नेटवर्क काम कर रहे हैं मल्टी-डोमेन अपराध कर रहे हैं। हमें टेक्नोलॉजी ड्रिवन के साथ ही कठोर तरीके नेटवर्क-सेंट्रिक लड़ाई लड़नी होगी। नशे के व्यापारी के प्रति रूथलेस और नशे के पीड़ित के प्रति सिम्पेथेटिक अप्रोच रखनी होगी। शाह ने एनसीबी की वार्षिक रिपोर्ट -2025 भी जारी की और जम्मू और गुवाहाटी में एनसीबी के जोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी किया। इस मौके पर ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन भी शुरू किया जिसमें 6,000 करोड़ से अधिक के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा है।

ऐसे लड़ेंगे नशे के खिलाफ लड़ाई

पहला स्तंभ –एंफोर्समेंट, इंटेलीजेंस और ऑपरेशन्स - नेटवर्क पर इंटेलिजेंस लीड बेस्ड टार्गेटेड कार्रवाई कर नेटवर्क को नष्ट करना

दूसरा स्तंभ –प्रीकर्शर्स और सिंथेटिक ड्रग कार्टेल - उत्पादन स्तर पर ही नशे को रोका जाए।

तीसरा स्तंभ- डिमांड और नुकसान को कम करना- समाज, शिक्षा और पुनर्वास

चौथा स्तंभ- कैपेसिटी बिल्डिंग, कॉर्डिनेशन, मॉनिटरिंग

- नशे के खिलाफ लड़ाई में तंत्र को सक्षम, समन्वित, जवाबदेह और आधुनिक बनाया जाना क्या है डिटेक्ट, डिसरप्शन और डेस्ट्रॉय की रणनीति डिटेक्ट सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में मानव सूचना ,टेक्निकल इंटेलिजेंस और कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए बाहर से आने वाली ड्रग्स को रोका जाएगा। डिसरप्ट अन्तरराष्ट्रीय तस्करों, अन्तरराज्यीय तस्करों और उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने वाले गिरोह तीनों प्रकार के कार्टेल को नष्ट करना।

-100 प्रमुख अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल की पहचान कर खत्म किया जाएगा। डार्क वेब मॉनिटरिंग, हवाला, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन, पोर्ट और एयरपोर्ट के उपयोग पर सभी वित्तीय एजेंसियों साझा तौर पर काम करेंगी। पीएमएलए और ईडी की भी इसमें भूमिका रहेगी। डेस्ट्रॉय नशे का व्यापार करने वालों के सोर्स ट्रांजिट, फाइनेंस और लीडरशिप के लेवल पर कानूनी प्रहार अवैध फसलों को नष्ट करने के लिए विशेष अभियान चलाना होगा।

-अवैध प्रयोगशालाओं को ढूंढ कर नष्ट किया जाना। नेटवर्क दोबारा खड़ा नहीं हो। पुराने आदतन अपराधी बचें नहीं। सरगना छिपे नहीं रहें। इसके लिए कानूनी प्रावधानों का पूरा इस्तेमाल हो। यह भी किया जाएगा

-40 से अधिक मंत्रालय, केंद्रीय एजेंसियां, राज्य सरकारें, जिला प्रशासन, शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समाज संगठन और नागरिक मिलकर नशीली दवाओं के खिलाफ एक समान राष्ट्रीय फ्रेमवर्क के तहत काम करेंगे

-सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ अभियान- मेथामफेटामाइन, मेफेड्रोन और नई सिंथेटिक दवाओं पर विशेष ध्यान ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स फ्रेमवर्क में नियामक सुधारों से फार्मेसी, दवाओं की ट्रैकिंग कर साइकोट्रोपिक पदार्थों के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी नशा छोड़ने, काउंसलिंग, इलाज और पुनर्वास सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा

नशा मुक्त भारत अभियान - देशव्यापी जागरूकता अभियान से 50 करोड़ से ज़्यादा नागरिकों तक नशे के खिलाफ लड़ाई को बढ़ाना

ड्रग-फ्री कैंपस - उच्च शिक्षण संस्थानों में जागरूकता, काउंसलिंग, ड्रग स्क्रीनिंग की पायलट पहल से ड्रग-फ्री कैंपस बनाना