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जल संरक्षण बन रहा जन आंदोलन, लेकिन अब असली परीक्षा असर की

देश में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का अभियान अब नए दौर में प्रवेश कर चुका है। 6 सितंबर 2024 को गुजरात के सूरत से शुरू हुई जल संचय जनभागीदारी (जेएसजेबी) 2.0 पहल के तहत अब तक 1.5 करोड़ से अधिक वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल संरक्षण और जल भंडारण संरचनाओं के निर्माण का दावा किया गया है
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नई दिल्ली

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Shadab Ahmed khan

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Updated: 27 Jun 2026, 10:28 AM IST

Jal Sanrakshan

नई दिल्ली। देश में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का अभियान अब नए दौर में प्रवेश कर चुका है। 6 सितंबर 2024 को गुजरात के सूरत से शुरू हुई जल संचय जनभागीदारी (जेएसजेबी) 2.0 पहल के तहत अब तक 1.5 करोड़ से अधिक वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल संरक्षण और जल भंडारण संरचनाओं के निर्माण का दावा किया गया है। इतने बड़े पैमाने पर हुए निर्माण से यह अभियान दुनिया के सबसे बड़े सामुदायिक जल संरक्षण अभियानों में शामिल हो गया है।

अभियान की खासियत यह है कि इसमें केवल सरकारी एजेंसियां ही नहीं, बल्कि पंचायतों, शहरी निकायों, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी भी है। इसी कारण इसे सरकारी योजना के बजाय जन आंदोलन के रूप में स्थापित करने की कोशिश की गई। अब सरकार का फोकस निर्माण की संख्या से आगे बढक़र संरचनाओं की गुणवत्ता और उनके वास्तविक प्रभाव पर है। जल शक्ति मंत्रालय ने नागरिकों से 31 जुलाई तक फीडबैक मांगा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि जिन जल संरचनाओं का निर्माण दिखाया गया है, वे वास्तव में काम कर रही हैं या नहीं।

छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान टॉप पांच राज्यों में

रैंक राज्य जल संरचनाओं का निर्माण पूर्ण (लाखों में)
1 आंध्र प्रदेश 31.08
2 छत्तीसगढ़ 23.08
3 मध्य प्रदेश 21.91
4 तेलंगाना 15.88
5 राजस्थान 5.82
6 बिहार 5.43
7 ओडिशा 2.82
8 उत्तर प्रदेश 2.74
9 गुजरात 2.20
10 तमिल नाडु 2.06

आमजन से कराया जा रहा सत्यापन

सरकार ने इस बार आमजन को इन संरचनाओं के सत्यापन और मूल्यांकन की प्रक्रिया से जोड़ा है। इससे न केवल रिपोर्टिंग की पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि यह भी स्पष्ट होगा कि करोड़ों रुपए की लागत से बनी जल संरक्षण संरचनाएं कागजों तक सीमित हैं या वास्तव में जल संकट कम करने में योगदान दे रही हैं।

आम जन से इन पर ले रहे फीडबैक

1. क्या जल संरचना वास्तव है और कार्य कर रहा है।

2. जल संरचना तो है, लेकिन कार्य नहीं कर रही

3. जल संरचना ही नहीं है

अभियान की असली कसौटी : आने वाले वर्षों में इन सवालों के जवाब से पता चलेगी

-भूजल स्तर में कितना सुधार हुआ?

-सिंचाई के लिए जल उपलब्धता कितनी बढ़ी?

-गर्मियों में पेयजल संकट कितना कम हुआ?

-सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल सुरक्षा कितनी मजबूत हुई?

-कितनी संरचनाएं आज भी कार्यशील और रख-रखाव की अच्छी स्थिति में हैं?

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