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केंद्र ने ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मामले में की कड़ी कार्रवाई

राजस्थान में ओक्सीटोसिन इंजेक्शन के मामले में कार्रवाई करते हुए केन्द्र ने निर्माता जैक्सन लैबोरेटरीज के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन और संबंधित राज्यों के ड्रग रेगुलेटर्स की संयुक्त जांच के बाद पंजाब और हिमाचल प्रदेश में कंपनी की यूनिट्स के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं
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नई दिल्ली

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Abhishek Singhal

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Updated: 27 Jun 2026, 11:53 AM IST

Oxytocin Injection

नई दिल्ली। राजस्थान में ओक्सीटोसिन इंजेक्शन के मामले में कार्रवाई करते हुए केन्द्र ने निर्माता जैक्सन लैबोरेटरीज के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन और संबंधित राज्यों के ड्रग रेगुलेटर्स की संयुक्त जांच के बाद पंजाब और हिमाचल प्रदेश में कंपनी की यूनिट्स के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि राजस्थान में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के प्रयोग से जुड़े मामलों में प्रसूताओं की मौत के समाचार प्रकाशित होने के बाद केन्द्र सरकार ने यह कार्रवाई की है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि केंद्र ने घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाने के लिए राजस्थान सरकार से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। अधिकारियों के अनुसार, सीडीएससीओ ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के राज्य ड्रग रेगुलेटर्स के साथ मिलकर जैक्सन लैबोरेटरीज की मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं की विस्तृत जांच की, ताकि 'गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज' के पालन का आकलन किया जा सके। जांच के दौरान पाई गई कमियों और संयुक्त जांच टीमों की सिफारिशों के आधार पर, संबंधित राज्य लाइसेंसिंग अधिकारियों ने संबंधित यूनिट्स के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि यह रेगुलेटरी कार्रवाई फार्मास्युटिकल सेक्टर में क्वालिटी और मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स के उल्लंघन के प्रति सरकार के 'ज़ीरो-टॉलरेंस' (सख्त) रवैये को दर्शाती है। मामले की आगे की जांच चल रही है, और जारी जांच के नतीजों तथा लागू रेगुलेटरी प्रावधानों के अनुसार अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय राजस्थान सरकार की विस्तृत रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहा है।

डब्ल्यूएचओ ने भी मांगी जानकारी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ) ने भी मामले में मीडिया रिपोर्ट्स के बाद भारत सरकार से अतिरिक्त जानकारी मांगी है। मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि डब्ल्यूएचओ ने ग्लोबल फार्माकोविजिलेंस और रेगुलेटरी निगरानी तंत्र की प्रक्रिया के तहत यह जानकारी मांगी है। डब्ल्यूएचओ नियमित रूप से विभिन्न देशों के नियामक बोर्ड से ऐसी जानकारी मांगता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके यह घटनाएं केवल किसी खास जगह तक ही सीमित हैं या उन अन्य देशों पर भी इसका कोई असर पड़ सकता है जहां उत्पाद का वितरण किया गया हो सकता है।

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