
नई दिल्ली: असम में लागू राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) मुद्दे पर सियासी गहमागहमी जारी है। दो दिनों से इस मुद्दे पर संसद में भी जोरदार हंगामा हो रहा है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने हैं। कांग्रेस और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मुद्दे का लगातार विरोध कर रही है। वहीं सत्तापक्ष विपक्ष को कटघरे में खड़ा कर रहा है। बुधवार को राज्यसभा में अमित शाह को विपक्ष की ओर से दोबारा नहीं बोलने देने पर भाजपा ने आपत्ति जताई है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने चर्चा से बचने का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि "कांग्रेस व टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) संसद में इस मसले पर चर्चा से क्यों डर रही हैं। वे जवाब क्यों नहीं सुनना चाहतीं? वे एनआरसी पर चर्चा से बचने के लिए जानबूझकर राज्यसभा को बाधित कर रही हैं।"इससे पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को राज्यसभा में अपना भाषण पूरा करना था, लेकिन विपक्षी सदस्यों के एनआरसी पर हंगामे की वजह से वह अपना भाषण नहीं पूरा कर सके।
जावड़ेकर ने कांग्रेस को पुरानी याद दिलाई
जावड़ेकर ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि उन्हें एनआरसी पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए क्योंकि इसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने शुरू किया था। उन्होंने कहा, "एनआरसी अवैध प्रवासियों की पहचान करने का माध्यम है और इसे 1984 में राजीव गांधी ने शुरू किया था और अब कांग्रेस उन्हें बचाना चाहती है। यहां तक कि इससे पहले इंदिरा गांधी ने भी कहा था कि अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश वापस जाना चाहिए।"
ममता बंगाल में लागू नहीं करने की कर रही मांग
गौरतलब है कि एनआरसी मुद्दे पर पिछले दो दिनों से संसद के दोनों संदनों में जोरदार हंगामा जारी है। बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जैसे ही इस मुद्दे पर जवाब देना शुरू किया कि टीएमसी और विपक्षी दलों के सांसदों ने हंगामा कर दिया। जिसके बाद राज्यसभा के सभापति ने कार्यवाही को स्थगित कर दिया। वहीं एनआरसी मुद्दे को पश्चिम बंगाल में लागू करने की अफवाह को लेकर ममता बनर्जी लगातार नेताओं से मिलकर बिल में संशोधन करने की मांग कर रही है।