2019 लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों में सीटों के बटवारे को लेकर खींचतान भी गठबंधन में रोड़ा बन रही है।
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद सियासी घमासान खड़ा हो गया है। अब जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में एक साल से भी कम का समय बचा है, तो माना जा रहा है कि भाजपा के रणनीतिकार अमित शाह ने यह कदम काफी सोच समझ कर उठाया है। राजनीतिक विश्लेशको का तो यहां तक कहना है कि जम्मू-कश्मीर के बाद अब भाजपा बिहार में भी बड़ा फैसला ले सकती है। दरअसल, कई राज्यों में हुए उपचुनावों में मिली हार के बाद भाजपा को अपनी चुनावी रणनीति दोबारा बनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यही कारण है कि भाजपा नेतृत्व अपने सहयोगी दलों के साथ मुखर हो उठा है।
भाजपा-जदयू गठबंधन?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जैसा ही फैसला बिहार में भी ले सकता है। बता दें कि बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) एक साल पहले एनडीए में शामिल हुई थी। शुरुआत में भाजपा इसको लाभ का सौदा मानकर चल रही थी, लेकिन अब स्थिति कुछ और नजर आ रही है। इसका नतीजा कुछ और नहीं बिहार में जोकीहाट विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा-जदयू गठबंधन को मिली करारी हार है। इस सीट पर जेडीयू के लिए इस वजह से भी अधिक महत्वपूर्ण थी क्योंकि यहां पिछले 20 सालों से पार्टी का कब्जा था।
सीटों को लेकर तनातनी
इसके अलावा 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों में सीटों के बटवारे को लेकर खींचतान भी गठबंधन में रोड़ा बन रही है। माना जा रहा है कि दोनों दलों के बीच सीटों के बटवारे को लेकर काफी तनातनी चल रही है। भाजपा नेता राजेंद्र सिंह के अनुसार पार्टी उन सभी 22 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी, जहां पिछले आम चुनाव में उसे सफलता मिली थी।