
Ashok Gehlot : कांग्रेस के नेता अशोक गहलोत। फाइल फोटो पत्रिका
Ashok Gehlot : राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाल गोपाल योजना के पाउडर मिल्क के रख-रखाव और वितरण में लापरवाही हो रही है। जिस वजह से स्कूलों में बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा है। कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं की आपूर्ति रोककर सरकार उन्हें खत्म करने की साजिश कर रही है, यही भाजपा सरकार का असली चेहरा है।
अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि मैंने विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले से ही आम जनता को चेताना शुरू किया था कि यदि भाजपा सत्ता में आ गई तो कांग्रेस सरकार के दौरान चल रही योजनाओं को बंद कर देगी। खुद प्रधानमंत्री मोदी जी को यह कहना पड़ा था कि ऐसा नहीं होगा।
भाजपा सरकार आधिकारिक आदेश निकालकर योजनाओं को बंद तो नहीं कर सकी, लेकिन योजनाओं के लिए जरूरी आपूर्ति ही बंद कर दी है, ताकि योजनाएं अपने आप दम तोड़ दें। बच्चों को स्कूल में दूध पिलाने की बाल गोपाल योजना इसका ताजा उदाहरण है।
अशोक गहलोत ने कहा कि बीते तीन महीनों में सिर्फ 41.9 प्रतिशत मिल्क पाउडर ही स्कूलों को सप्लाई हो पाया है। भरतपुर, अलवर, उदयपुर, ढोलपुर, डीग, खैरथल, बूंदी, नागौर, करौली, जैसलमेर, डीडवाना-कुचामन, बारां, बीकानेर, कोटपूतली-बहरोड़, पाली और प्रतापगढ़ जैसे कई जिलों में तो अप्रैल से सितंबर 2026 की मांग के लिए दूध की सप्लाई अब तक शुरू ही नहीं हुई।
अशोक गहलोत ने कहा कि यह लापरवाही नहीं, सोची-समझी रणनीति है, जिसके लिए मैंने पहले ही चेताया था। जनकल्याणकारी योजनाओं को खुलेआम बंद करने की हिम्मत नहीं तो चुपचाप आपूर्ति रोककर उन्हें खत्म करने की साजिश, यही भाजपा सरकार का असली चेहरा है।
पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत सप्ताह में 6 दिन दूध उपलब्ध करवाया जाता था। इस योजना के तहत बच्चों को पाउडर मिल्क मिलता है। योजना के तहत कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को 150 मिली तैयार दूध उपलब्ध कराया जाता है, जबकि कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को 200 मिली दूध दिया जाता है। इसके लिए क्रमशः 15 ग्राम और 20 ग्राम मिल्क पाउडर का उपयोग किया जाता है। RCDF स्कूलों तक मिल्क पाउडर की आपूर्ति करता है। पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के लिए राज्य निधि से ₹722 करोड़ रखा गया है। यह योजना राजस्थान की राज्य वित्त पोषित पोषण योजना है।
अशोक गहलोत ने एक और योजना का जिक्र कर कहा कि VB-G RAM G योजना, जिसने 1 जुलाई से MGNREGA की जगह ली, अपने पहले ही महीने में बुरी तरह फेल साबित हुई है। जुलाई 2026 में सिर्फ 7.67 करोड़ मानव दिवस रोजगार सृजित हुआ, जबकि पिछले साल इसी महीने MGNREGA के तहत 15.33 करोड़ मानव दिवस रोजगार मिला था, यानी करीब 50 प्रतिशत की भारी गिरावट। साथ ही प्रति व्यक्ति खर्च भी 4,494 रुपए से घटकर 4,199 रुपए रह गया है जबकि इस बार बारिश की कमी के कारण अधिक मानव दिवस होने चाहिए थे।
यह वही योजना है जिसे लेकर कांग्रेस पार्टी ने पहले ही चेताया था कि फंडिंग अनुपात 90:10 से घटाकर 60:40 करना, डिमांड-ड्रिवन (मांग आधारित) मॉडल को सप्लाई-ड्रिवन (आपूर्ति आधारित) बनाना और काम के कानूनी अधिकार को खत्म करना गरीब मजदूरों के लिए विनाशकारी साबित होगा। आज आंकड़े खुद इस आशंका को सही साबित कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जिन परिवारों की आजीविका मनरेगा पर टिकी थी, वे आज रोजगार से वंचित हो रहे हैं। आने वाले दिनों में स्थिति और विकट होने वाली है। केन्द्र सरकार तुरंत इस योजना की खामियों को दूर कर ग्रामीण रोजगार सुनिश्चित करे जिससे गांव में बेरोजगारी से स्थिति खराब न हो।
Updated on:
10 Aug 2026 04:02 pm
Published on:
10 Aug 2026 03:57 pm
