
केंद्र सरकार में भाजपा के सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने नागरिकता संशोधन कानून पर सवाल उठाते हुए इसमें मुसलमानों को भी जोड़ने की मांग की है। अकाली दल से राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल ने कहा कि- 'अकाली दल पूरी तरह से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्ट के खिलाफ है। लेकिन CAA में मुसलमानों को शामिल किया जाना चाहिए।'
प्रताड़ित सिखों को नागरिकता देने का समर्थन
गौर हो, सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक रूप से प्रताड़ित हिंदू, सिख, पारसी, बुद्ध, क्रिश्चियन भारतीय नागरिकता ले सकते हैं। जबकि इन देशों के मुसलमानों को सीएए के दायरे से बाहर रखा गया है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार- अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल ने कहा कि- 'सीएए को लेकर शिरोमणि अकाली दल असमंजस की स्थिति में हैं। इसमें धार्मिक रूप से प्रताड़ित किए गए सिखों को नागरिकता देने की बात की गई है, इसलिए इस कानून का हम समर्थन कर रहे हैं। जबकि पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल की राय है कि सीएए में मुसलमानों को भी शामिल करना चाहिए।'
नरेश गुजराल ने कहा कि- 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एनडीए की बैठक में नागरिकता कानून जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा नहीं होती है। शायद इसीलिए एनडीए के कई घटक दल सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर दुखी हैं।'
सीएम नीतीश कुमार ने भी जताया था विरोध
बता दें, नरेश गुजराल का बयान बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बयान के एक दिन बाद आया है। एनडीए की सहयोगी पार्टी जद (यू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने भी एनआरसी का विरोध किया था। वहीं दूसरी ओर, ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक, आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी, बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी एनआरसी के साथ-साथ सीएए के विरोध में हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया
इस मौके पर गुजराल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि- 'हम आज वाजपेयी जी के समय को याद करते हैं। उन्होंने 20 पार्टियों को एक धागे में पिरोकर रखा था। खास बात ये थी कि उनके दौर में हर पार्टी खुश थी। हर पार्टी को सम्मान दिया जाता था।