
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK स्टालिन ने प्रदेश में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच की एंट्री पर रोक लगा दिया है। मुख्यमंत्री स्टालिन के इस फैसले के बाद अब प्रदेश में CBI को किसी भी जांच से पहले राज्य सरकार से परमिशन लेनी पड़ेगी। देश में ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी मुख्यमंत्री ने अपने राज्य में CBI पर बैन लगाया है। इससे पहले भी देश में कई राज्यों ने CBI की एंट्री पर रोक लगा रखा है।
बिजली मंत्री को हिरासत में लेने के बाद लिया फैसला
मुख्यमंत्री MK स्टालिन ने बुधवार को अपने बिजली मंत्री वी संथाली बालाजी को मनी लॉन्ड्रींग केस में हिरासत में लेने के बाद यह फैसला लिया है। बता दें कि ईडी ने धनशोधन के एक मामले में बालाजी और कुछ अन्य लोगों के परिसरों पर छापे मारे थे।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इरोड के अलावा बालाजी के गृह जिले करूर में भी तलाशी ली गई थीय़ ईडी के अधिकारियों ने कहा कि यहां सचिवालय में बालाजी के कार्यालय के कमरे में भी तलाशी ली गयी। तलाशी और छापेमारी के दौरान बालाजी की तबियत बिगड़ गई और उन्हें अस्पतला में भर्ती करना पड़ा था।
तमिलनाडु सचिवालय में दूसरी बार हुई छापेमारी
किसी मंत्री के घर और सचिवालय में छापेमारी की यह दूसरी घटना है। इससे पहले प्रदेश में CBI से जुड़े अधिकारियों ने सचिवालय के 6 साल पहले तलाशी ली थी। दिसंबर 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता की मृत्यु के कुछ दिन बाद तत्कालीन मुख्य सचिव पी. राममोहन राव के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आयकर अधिकारियों ने सचिवालय में तलाशी ली थी।
CBI पर रोक लगाने वाला दसवां राज्य बना तमिलनाडु
आपको बता दें कि CBI पर रोक लगाने वाला तमिलनाडु कोई पहला राज्य नहीं है। इससे पहले भी देश के 9 राज्य छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, मेघालय, मिजोरम, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल ने सीबीआई को दी गई अपनी आम सहमति वापस ले ली है। इस रोक के बाद CBI को अगर इन राज्यों में किसी केस की जांच करनी होती है तो उन्हें पहले राज्य सरकार की अनुमति लेनी पड़ती है।