
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से राजनीतिक दलों के बीच जंग देखने को मिल सकता है। दरअसल बुधवार 18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र पर सभी दलों की नजरें टिक गई है। क्योंकि इसी सत्र में राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव होना है। कांग्रेस और भाजपा इस पद पर अपने-अपने उम्मीदवार को जीतने हुए देखना चाहती है लेकिन राज्यसभा में दोनों दलों के पास इतनी संख्या नहीं है कि वे अकेले दम पर इस सीट पर जीत दर्ज कर सकें। अब ऐसे में यूपीए और एनडीए के छोटे सहयोगी दल भी इस चुनाव को लेकर दिलचस्पी दिखाने लगे हैं। इसी बीच कांग्रेस की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि वह उपसभापति की सीट अपने सहयोगी दल राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को ऑफर कर सकती है। इस बात से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस बड़ा दिल दिखाते हुए अपने सहयोगी दल के सदस्य को समर्थन कर सकती है।
1 जुलाई को खत्म हो चुका है उपसभापति का कार्यकाल
आपको बता दें कि राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन का कार्यकाल आगामी 1 जुलाई को खत्म हो गया है। 18 जुलाई बुधवार से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। इसके मद्देनजर सभी राजनीतिक दल उपसभापति के सीट को जीतने के लिए गुणा-भाग में लग गए हैं। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी और एनसीपी के उम्मीदवार को समर्थन कर सकती है। आपको बता दें कि आगामी आम चुनाव में विपक्षी दलों की एकता को मजबूत करने के लिए कांग्रेस अपने सहयोगी दलों के बीच यह विश्वास जगाने की कोशिश कर रही है कि उसका दिल बड़ा है। बता दें कि एनसीपी कांग्रेस की पुरानी सहयोगी पार्टी रही है, हालांकि 2014 के विधानसभा के चुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ी थी। इसमें कांग्रेस ने 27 सीटों पर चुनाव लड़कर दो सीटें जबकि एनसीपी 21 सीटों पर चुनाव लड़कर चार सीटें जीतने में सफलता हासिल की थी। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि सभी क्षेत्रीय दल इस चुनाव में कांग्रेस को जिताने के लिए नहीं बल्कि भाजपा को हराने के लिए एक मंच पर साथ आना चाहते हैं। बता दें कि आगामी सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में प्रतिपक्ष नेता गुलाम नबी आजाद की अध्यक्षता में विपक्षी दलों की बैठक होनी है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में उपसभापति के चुनाव समेत मानसून सत्र की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी।