बच्‍चियों से रेप मामलों में फांसी की सजा की मांग पर अनशन पर बैठीं दिल्‍ली महिला आयोग की अध्‍यक्ष स्‍वाति मालीवाल ने अनशन समाप्त करने की घोषणा की है।
नई दिल्ली। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल 9 दिन से चला आ रहा अपना अनशन आज खत्म करेंगी। बच्चियों से रेप के मामलों में दोषों को फांसी देने की मांग पर अनशन पर बैठीं स्वाति मालीवाल रविवार दोपहर 2 बजे के बाद अपना अनशन तोड़ेंगी। शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने यह जानकारी दी। उन्होंने अपनी सारी मांगे माने जाने के बाद अपना अनशन समापत करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार की पूरी कैबिनेट का आभार जताया। उन्होंने कहा है कि अगर तीन महीने में केंद्र सरकार अपना वादा नहीं पूरा करती या स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो वह इससे कड़े अनशन पर बैठ जाएंगी।
बता दें कि कल शनिवार केंद्रीय कैबिनेट ने 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप की घटनाओं पर रोकथाम करने के लिए मृत्युदंड देने वाले अध्यादेश को मंजूरी दी है।
खुद को कहा पीएम की जिद्दी बेटी
कल अनशन स्थल पर प्रेस वार्ता के दौरान स्वाति मालीवाल ने कहा कि "केंद्र सरकार के पाक्सो में किये गए संशोधनों की एक प्रति उन तक पहुँच चुकी है। इसमें हमारी सारी मांगे मान ली गई हैं। मुझे ज्ञात हुआ है कि छोटी बच्चियों के बलात्कारियों को फांसी दी जाएगी। मैं पीएम की आभारी हूं कि उन्होंने अपनी इस जिद्दी बेटी की बात मान ली है।" उन्होंने कहा कि 'मैंने निर्णय लिया है कि रविवार को दोपहर 2 बजे मैं अपना अनशन समाप्त करूंगी।'
ये थीं स्वाति मालीवाल की मांगें
स्वाति मालीवाल ने इन मांगों के लिए अनशन करने की घोषणा की थी-
- बच्चियों से रेप के मामलों में फांसी की सजा के लिए कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश पारित हो।
- देश भर की सरकारों और पुलिस बल के लिए ऐसे मामलों में संयुक्त राष्ट्र के मानकों के हिसाब से काम करने को कहा जाए
- दिल्ली पुलिस के साथ साथ अन्य विभागों के 14000 कर्मियों की फाइलों पर अविलम्ब फैसला लिया जाए।
- देश भर में रेप मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बढ़ाये जायें। दिल्ली में संचालित व प्रस्तावित फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट्स के लिए केंद्र सरकार अपने हिस्से का 50% अंशदान करे।
- दिल्ली में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध को देखते हुए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की जाये जिसमे गृह मंत्री, उपराज्यपाल, मुख्मंत्री, महिला आयोग व् पुलिस कमिश्नर हों जो हर महीने देश की राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा का जायजा ले।