
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर देशभर में सियासी गहमागहमी पूरे शबाब पर है। विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के असर से निपटने की होगी। पिछले चुनाव में अपने दम पर भारतीय जनता पार्टी को दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार कराने वाले मोदी की लहर अभी भी बरकरार है। इससे निपटने के लिए समूचा विपक्ष एकजुट हो गया है और फेडरल फ्रंट से लेकर महागठबंधन तक की कवायद जोरों पर है। लेकिन विपक्ष के सामने सबसे बड़ा सवाल इस तीसरे मोर्चे के नेतृत्व को लेकर है। एक चैनल ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से इसी को लेकर एक सवाल पूछा था। सवाल था कि क्या राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे? हालांकि इस पर उन्होंने सीधा-सीधा जवाब नहीं दिया।
...ये था तेजस्वी का जवाब
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्षी पार्टियों में प्रधानमंत्री बनने के लिए बहुत सारे उम्मीदवार हैं। राहुल के नाम पर ममता और मायावती जैसी शख्सियतों की सहमति के सवाल पर तेजस्वी बोले, 'जब यूपीए सरकार के गठन से पहले भी मनमोहन सिंह का नाम पहले नहीं आया था। बाद में सबने मिलकर गठबंधन बनाया और 10 साल तक सरकार चली। अभी तक प्रधानमंत्री उम्मीदवार का दावा आधिकारिक रूप से किसी ने भी नहीं किया है। लेकिन कोई भी राजनीतिक पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनती है तब तो वह दावा करेगी ही करेगी।
जब तक संघ-भाजपा हैं संविधान को खतरा रहेगा
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान को भाजपा सरकार से बचाने के लिए वे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा जब तक रहेंगे तब तक संविधान को खतरा रहेगा।