कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध लंबा चलने के आसार केद्र ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है कि वो कृषि कानूनों को लेकर आत्मसमर्पण के मूड में नहीं
नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों ( Farm Laws ) को लेकर केंद्र सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध ( Protest Against Agriculture Laws ) लंबा चलने के आसार नजर आ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है यह है कि केद्र सरकार ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है कि वो कृषि कानूनों को लेकर आत्मसमर्पण के कतई मूड में नहीं है। यही वजह है कि गृहमंत्री अमित शाह ( Union home minister amit shah ) की अध्यक्षता में गुरुवार को भाजपा मुख्यालय ( BJP headquarters ) पर हुई हाई लेवल मीटिंग में सितंबर में बने तीनों कृषि कानूनों को मजबूती से डिफेंड करने के साथ किसानों का समर्थन जुटाने का निर्णय लिया गया। इस हाई लेवल मीटिंग में कहा गया कि विपक्ष और कुछ संगठनों की ओर से फैलाए गए भ्रम को दूर करते हुए तीनों कानूनों का पार्टी कार्यकर्ताओं को मजबूती से बचाव करने के लिए लगातार अभियान चलाना चाहिए।
देश भर के किसान सच्चाई से मुखातिब होंगे
मीटिंग में फैसला लिया गया कि जब देश भर के किसान सच्चाई से मुखातिब होंगे तो उनका भ्रम दूर होगा, जिससे आंदोलन का असर कम होगा। मीटिंग में किसानों के बीच जनसंपर्क अभियान में तेजी लाने पर जोर दिया गया। इस बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान संगठनों के साथ अब तक चली बातचीत में उठे मुद्दों की जानकारी दी। उन्होंने किसान आंदोलन के विभिन्न पहलुओं पर सभी को अवगत कराया। किसान आंदोलन हल होने की राह में कुछ किसान संगठनों की ओर से उत्पन्न चुनौतियों की भी जानकारी दी।
किसानों का समर्थन जुटाएगी पार्टी
बीजेपी मुख्यालय पर हुई इस हाई लेवल मीटिंग में कहा गया कि अनेक किसान संगठनों ने तीनों कृषि कानूनों का समर्थन किया है। ऐसे में कानूनों के बारे में देश भर में सही जानकारी दिए जाने पर धीरे-धीरे और किसानों का समर्थन सरकार को मिलेगा। भाजपा कार्यकर्ताओं को किसानों के बीच जाकर समर्थन जुटाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत भाजपा महासचिव और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।