कर्नाटक विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद सत्ता के लिए राजनीति उठापटक का दौर जारी है।
नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद सत्ता के लिए राजनीतिक उठापटक का दौर जारी है। यह राजनीतिक उठापटक का ही नतीजा है कि एक जमाने से धुर-विरोधी रहे कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी अब एक साथ आ खड़े हुए हैं। यही नहीं दोनों नेताओं को आपसी विचार-विमर्श के साथ ही एक-दूसरे की बातों पर सहमतियां जताते हुए देखे जा सकता है।
मोदी विरोध या सियासी मजबूरी
चुनावी नतीजों के बाद कर्नाटक में पैदा हुई सियासी हलचल ने सारे समीकरण बदल कर रख दिए हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार कुमारस्वामी और सिद्धारमैया की अलग-अलग डगर होने के कारण कांग्रेस और जेडीएस के गठजोड़ की कोई संभावना नजर नहीं आ रही थी। अब इसे सरकार बनाने की मजबूरी कहें या फिर मोदी की खिलाफत के दोनों ही धुर-विरोधी नेता अब सुर में सुर मिलाते दिख रहे हैं। राजभवन में राज्यपाल वजुभाई वाला के समक्ष कुमारस्वामी और सिद्धारमैया ने अपनी अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया है।
क्यों छोड़ दिया था देवगौड़ा का साथ
दरअसल, कर्नाटक के सियासी इतिहार पर गौर करें तो सिद्धारमैया कभी पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के सबसे करीबी हुआ करते थे। यहां तक कि सिद्धारमैया देवगौड़ा को ही अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। लेकिन सिद्धारमैया ने देवगौड़ा का साथ इस वजह से छोड़ दिया था क्योंकि उनके साथ एक अरसे ते मेहनत व ईमानदारी से काम करने बाद भी देवगौड़ा ने उनकी बजाए अपने बेटे कुमारस्वामी को आगे बढ़ाने का काम किया। इसके बाद अलग-थलग पड़े सिद्धारमैया ने अपना सियासी वजूद कायम रखने के लिए अहिंदा (अल्पसंख्यक, ओबीसी और दलित) का गठन किया। और कांग्रेस से नजदीकियां बढ़ानी शुरू की।