कर्नाटक के राज्यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया है। अब येदियुरप्पा गुरुवार की सुबह 9.30 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे
नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद उभरा राजनीतिक बवाल अब थम गया है। कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने बीजेपी को सरकार बनाने के लिए न्योता दिया है। जिसके तहत बीजेपी की ओर से येदियुरप्पा गुरुवार की सुबह 9.30 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। राज्यपाल इस बात का संकेत पहले ही दे चुके थे कि वो सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता पहले देंगे।
21 मई तक साबित करना होगा बहुमत
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शामिल नहीं हो रहे हैं। सीएम पद का शपथ लेने के बाद 21 मई तक येदियुरप्पा को बहुमत साबित करना होगा। बुधवार की दोपहर में मीडिया से बात करते हुए येदियुरप्पा ने पहले ही दावा किया था कि वो कल सीएम पद की शपथ लेंगे।
येदियुरप्पा पहले ही कर चुके हैं दावा
बुधवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक में बीएस येदियुरप्पा को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इस बैठक में नेता चुने जाने के बाद वो राजभवन जाकर राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा पेश किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मैं, कल सीएम पद की शपथ लूंगा। बता दें कि बीएस येदियुरप्पा चुनाव प्रचार के समय से ही दावा करते रहे हैं वो सीएम बनेंगे और 17 मई को सीएम पद की शपथ लेंगे। ठीक वैसा ही हुआ
राज्यपाल पर थी सबकी निगाहें
कर्नाटक विधानसभा के नतीजों में किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए बहुमत नहीं मिला। 104 सीटों के साथ बीजेपी कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी। लेकिन बहुमत तक नहीं पहुंच सकी। सरकार बनाने के लिए बीजेपी के खाते में आठ और विधायक की जरुरूत है। वहीं कांग्रेस 78 और जेडीएस 38 सीटों के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने का दावा पेश कर चुकी है। ऐसे में सभी की निगाहें राज्यपाल पर लगी हुई थी कि वो सरकार बनाने के लिए किसे बुलाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट जा सकती है कांग्रेस
राजनीतिक सूत्र पहले ही बता चुके हैं कि अगर राज्यपाल बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बुलाती है तो कांग्रेस बड़ा कदम उठा सकती है। बताया जा रहा है कि ऐसी स्थिति में कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। अब सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस गवर्नर के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकती है। इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति से शिकायत भी की जा सकती है।