देश में कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच सियासी उठापटक भी सातवें आसमान पर मध्य प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता संघर्ष की लड़ाई तूल पकड़ती जा रही
नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस ( Coronavirus outbreak ) के प्रकोप के बीच सियासी उठापटक भी सातवें आसमान पर है। मध्य प्रदेश ( MP ) में ज्योतिरादित्य सिंधिया ( Jyotiraditya Scindia ) एपिसोड के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता संघर्ष की लड़ाई तूल पकड़ती जा रही है।
ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ( Congress Leader Digvijay Singh ) बेंगलुरु के रिजॉर्ट में रुके कांग्रेस के 16 बागी विधायकों ( Congress Rebel MLAs ) से मिलने की मांग पर अड़े हैं।
इसके लिए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय ( Supreme Court ) में याचिका दायर करने की बात कही है। लेकिन इस बीच उनको कर्नाटक हाईकोर्ट ( Karnataka High Court ) से बड़ा झटका लगा है।
दरअसल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने बागी विधायकों से मुलाकात की मांग की थी।
मामले की अगली सुनवाई अब 26 मार्च को होगी। दिग्विजय सिंह का कहना है कि वह राज्यसभा सांसद है और उनको विधायकों से मिलने की अनुमति दी जाए।
यही नहीं दिग्गी राजा ने यहां तक कि पहले वह सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे और फिर एक बार और धरने पर बैठने की बात पर विचार करेंगे।
आपको बता दें कि बुधवार को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को बेंगलुरु में उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह बागी विधायकों से मुलाकात करने पहुंचे थे।
इसके बाद दिग्विजय पुलिस स्टेशन में ही भूख हड़ताल पर बैठ गए। वही, मध्य प्रदेश में जारी सियासी घमासान के बीच कांग्रेस के विधायकों ने बुधवार को राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की।
कांग्रेस ने राज्यपाल टंडन को ज्ञापन देकर बेंगलुरू में बंधक बनाए गए कांग्रेस के बागी विधायकों को मुक्त कराने की मांग की।
राजधानी के एमपी नगर स्थित होटल मैरियट में कांग्रेस के विधायक ठहरे हुए हैं। बुधवार को ये विधायक बस से राजभवन पहुंचे और उन्होंने राज्यपाल टंडन से मुलाकात की।
राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है, "16 विधायकों को बेंगलुरू में भाजपा ने बंधक बनाया है। इन विधायकों को मुक्त कराने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ आप से निवेदन कर चुके हैं।"