यह बात कम ही लोगों को मालूम होगी कि करुणानिधि की फिल्मों में एम. जी. रामचंद्रन बतौर नायक काम कर चुके हैं।
नई दिल्ली। डीएमके चीफ एम करुणानिधि के निधन के साथ तमिलनाडु की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया। उनके निधन की खबर पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों की आंखों से आंसू बनकर छलकती करुणानिधि की याद उनके सियासी वजूद की कहानी बयां करती है। लेकिन देश की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ने वाले करुणानिधि से जुड़ी एक कहानी के बारे में शायद ही कुछ लोगों ने पढ़ा या सुना होगा। दरअसल, करुणानिधि के सियासी सफर का रास्ता फिल्मों से होकर गया था। अपनी सियासी विचारधारा जन समुदाय तक पहुंचाने के लिए करुणानिधि ने फिल्मों को अपना माध्यम बनाया। करुणानिधि की फिल्मी कहानियों ने लोगों के दिलो-दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी। लोगों में उनकी फिल्मों की कहानियों को लेकर दीवानगी इस हद तक थी कि इनके नायक भी सुपरस्टार बन गए।
यह बात कम ही लोगों को मालूम होगी कि करुणानिधि की फिल्मों में एम. जी. रामचंद्रन बतौर नायक काम कर चुके हैं। हालांकि यह उनकी फिल्मों का शुरुआती दौर था। उन्होंने अपनी पहली फिल्म राजकुमारी में रामचंद्रन को ही नायक का रोल आॅफर किया। फिर क्या था उनकी फिल्मों का यही नायक आगे चलकर न केवल सुपरस्टार बनकर उभरा, बल्कि दक्षिण की राजनीति का नायक साबित हुआ। यही रामचंद्रन आगे चलकर करुणानिधि के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की भूमिका में आ गए।
रामचंद्रन ही नहीं करुणानिधि ने शिवाजी गणेशन जैसे कलाकारों का फिल्मी करियर संवारा और वो रातों रात सुपरस्टार बन गए। बस फिर क्या था शिवाजी गणेशन ने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। करुणानिधि ने भी शिवाजी को अपनी अधिकांश फिल्मों में बतौर नायक का रोल दिया। जानकारों की मानें तो तमिल की प्रसिद्ध अदाकारा पद्मिनी की फिल्मी करियर अर्श पर पहुंचाने में भी करुणानिधि का बड़ा हाथ रहा।