महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के बीच शिवसेना-कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस की सरकार बनने के संकेत इसके लिए तीनों दलों ने बीच हुई एक संयुक्त बैठक में न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर चर्चा कर ली गई है
नई दिल्ली।महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के बीच शिवसेना-कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस की सरकार बनने के संकेत मिल रहे हैं।
जिसको लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसके लिए तीनों दलों ने बीच हुई एक संयुक्त बैठक में न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर चर्चा कर ली गई है।
लेकिन फिलहाल दो मुद्दे ऐसे हैं जिन पर अभी शिवसेना की ओर से बात अटकी हुई है।
दरअसल, शिवसेना की ओर से मांग की गई है कि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाए। वहीं, कांग्रेस और एनसीपी मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण देने की मांग कर रही है।
आपको बता दें कि महाराष्ट्र में हिंदुत्व की राजनीति करने वाली शिवसेना लंबे समय वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग कर रही है। लेकिन लेकिन कांग्रेस-एनसीपी इसके लिए सहमत नहीं है।
ये दोनों सावरकर को एक विवादास्पद किरदार मानती हैं। कांग्रेस सावरकर को महात्मा गांधी की हत्या से जोड़कर देखती है।
वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिमों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण की मांग की है। शिवसेना को एनसीपी की इस मांग से आपत्ति हो सकती है।
अब ऐसे में ये दोनों मुद्दे एनसीपी और शिवसेना के गले की फांस बन सकते हैं। आपको बता दें कि तीनों राजनीतिक दलों के बीच बने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) के अंतर्गत शिवसेना को पूर्णकालिक मुख्यमंत्री पद मिलेगा।
इसके साथ ही एनसीपी और कांग्रेस को 14 और 12 मंत्रीपद मिलेंगे। इसके साथ ही सीएम पद के साथ 14 मंत्री पद भी मिलेंगे।