केंद्र सरकार एमजे अकबर पर कोई भी फैसला लेने से पहले इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी।
नई दिल्ली। मीटू कैंपेन में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर का नाम आने और विपक्ष की ओर से उनका इस्तीफा मांगे जाने के बाद केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले उनके बचाव में उतर आए हैं। अठावले और शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने मीटू कैंपेन पर नाराजगी जताई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस मामले में सरकार को कोई भी फैसला लेने से पहले एकजे अकबर का भी पक्ष सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि सालों बाद किसी पर आरोप लगाना ठीक नहीं है। उन्होंने मीटू कैंपेन निंदा की है।
मुश्किल में अकबर
मी टू कैंपेन के चलते कई महिलाओं की ओर से यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर मुश्किल में पड़ते नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार की ओर से उन्हें नाइजीरिया दौरे को जल्द खत्म कर गुरुवार तक वापस लौटने को कहा गया है। मीटू कैंपेन के तहत कई महिलाओं ने उन पर तमाम मीडिया संस्थानों में संपादक रहते हुए यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। इस मुद्दे पर कुछ नेताओं और जानकारों का कहना है कि एक बात समझ नही आती कि केवल चुनाव के वक्त ही ऐसी बाते क्यों होती हैं। उससे पहले ये सब कहां सोते रहते हैं। इस मामले मे राजनीति के अतिरिक्त कुछ नजर नही आ रहा।
कुछ मामले गंभीर
जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार एमजे अकबर पर कोई भी फैसला लेने से पहले इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी। हम बिना सोचे-समझे कोई फैसला नहीं लेना चाहते। यह महिला सुरक्षा से जुड़ा मसला है, जो पीएम के लिए महत्वपूर्ण है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक नेता ने कहा कि कुछ शिकायतें गंभीर हैं और उन पर विचार किया जा रहा है। खासकर राजनीतिक दलों और पत्रकारों के बीच अकबर के खिलाफ बन रही राय उनके खिलाफ जा रहा है।