संसद के मानसून सत्र से पहले हो सकता है मोदी कैबिनेट का विस्तार, इस बार सहयोगी दलों को मिल सकती है ज्यादा तरजीह
नई दिल्ली। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव, पश्चिम बंगाल चुनाव में निर्धारित लक्ष्य से दूरी और कोरोना संक्रमण को लेकर बढ़ रही चुनौतियों के बीच मोदी सरकार ( Modi Government ) ने कमर कस ली है। इस क्रम में सबसे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार (Cabinet) की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
इस काम को संसद ( Parliament ) के मानसून सत्र ( Monsoon Session ) से पहले ही अंजाम दिया जा सकता है। पीएम मोदी ( pm modi ) ने शुक्रवार की शाम गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने अपने मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा की। मंत्रियों के काम की समीक्षा को कैबिनेट विस्तार से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
इसलिए बढ़ी सुगबुगाहट
मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर सुगबुगाहट इसलिए बढ़ी क्योंकि शुक्रवार को पीएम मोदी ने अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ मंत्रालयों की समीक्षा शुरू कर दी है। आमतौर पर मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार के पहले इस तरह की कवायद की जाती है।
12 जून को ये मंत्री हुए तलब
पीएम आवास पर शनिवार को मुख्तार अब्बास नकवी, धर्मेंद्र प्रधान, हरदीप पुरी, महेंद्रनाथ पांडे, गजेंद्र सिंह शेखावत को उनके मंत्रालय में हुए काम के साथ बुलाया गया है।
19 मंत्रियों के लिए विकल्प मौजूद
मोदी सरकार में फिलहाल उनके अलावा 21 कैबिनेट और 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 29 राज्य मंत्री हैं यानी कुल 60 मंत्री हैं। जबकि संविधान के मुताबिक इनकी संख्या 79 तक हो सकती है। ऐसे में 19 मंत्रियों को शामिल करने का विकल्प पीएम मोदी के पास मौजूद है।
इनको मिल सकती है कैबिनेट में जगह
जिन सदस्यों को पीएम मोदी की कैबिनेट के भावी फेरबदल और विस्तार में जगह मिल सकती है, उनमें असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, बैजयंत पांडा के नामों की चर्चा हो रही है।
यही नहीं बिहार चुनाव के बाद इस बार के कैबिनेट विस्तार में जनता दल यू को भी शामिल करने की स्थितियां बन सकती हैं।
सहयोगी दलों को तरजीह
मोदी कैबिनेट में मौजूदा समय में सिर्फ रिपब्लिकन पार्टी के रामदास आठवले को ही मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस विस्तार में अन्य सहयोगी दलों को भी तरजीह दी जा सकती है।