राजनातिक जानकारों की मानें तो घाटी में पत्थरबाजों पर लगाम कसने के लिए बीजेपी ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ा।
नई दिल्लीः जम्मू-कश्मीर में अचानक पीडीपी से गठबंधन तोड़ने पर अब कयास लग रहे हैं कि बीजेपी ने ऐसा क्यों किया। क्या बीजेपी घाटी में कोई मास्टर स्ट्रोक खेलने की तैयारी में तो नहीं है। लोग सोचने पर मजबूर हैं कि बीजेपी ने आगामी लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा क्यों किया। हमेशा बातचीत के जरिए विवादित मसले को सुलझाने का दावा करने वाली बीजेपी बिना किसी बड़े कारण के जम्मू-कश्मीर की सत्ता से अलग तो होगी नहीं। जानकारों की मानें तो बीजेपी जम्मू-कश्मीर में कुछ नया खेल करने की तैयारी में है।
देश को बढ़ा संदेश देने की तैयारी
मंगलवार को देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलना और फिर जम्मू-कश्मीर के बीजेपी नेताओं के साथ दिल्ली में बैठक करना कुछ तो संकेत देता है। पीडीपी से अलग होने के बाद बाद शाम चार बजे तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन.एन वोहरा का कार्यकाल बढ़ाने की घोषणा आप में केंद्र सरकार के मजबूत इरादे को दर्शाता है। 25 जून को खत्म होने जा रहा वोहरा का कार्यकाल अब तब तक रहेगा जब तक कि नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हो जाती। राजनातिक गलियारों में चल रही खबरों पर अगर यकीन करें तो बीजेपी लोकसभा चुनाव से पहले जम्मू-कश्मीर के जरिए देश को एक बड़ा संदेश देना चाहती है।
आतंकवादियों और पत्थरबाजों पर लगेगी लगाम
जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगने के बाद केंद्र सरकार का घाटी में पूरा नियंत्रण हो जाएगा। अब केंद्र सरकार घाटी में पत्थरबाजों और आतंकियों के खिलाफ बिना किसी दबाव के काम कर सकेगी। माना जा रहा है कि एनएसए अजीत डोभाल से मुलाकात और पीडीपी से गठबंधन तोड़ने के बाद अमित शाह के मन में शायद ऐसा ही कुछ चल रहा होगा। माना जा रहा है कि यहां पर राज्यपाल शासन लगाकर मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पत्थरबाजों पर कड़ी कार्रवाई करेगी। अलगाववादियों और पत्थरबाजों पर सख्त रवैया अपनाकर पीएम मोदी लोकसभा चुनाव से पहले देश को बड़ा संदेश देना चाहते हैं। क्योंकि घाटी में आए दिन शहीद हो रहे जवानों की वजह से देश में गुस्से का माहौल है और सरकार विपक्ष के निशाने पर है।