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‘यह सिर्फ सफेद पट्टी का नहीं, मराठी बनाम बाहरी का मुद्दा है’, जैन समुदाय को लेकर ये क्या बोल गए मनसे नेता

Mumbai White Line Controversy: मुंबई के कई इलाकों में सड़कों पर जैन धर्मगुरुओं के लिए बनाई गई सफेद पट्टियों को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और जैन समुदाय के बीच विवाद गहराता चला जा रहा है। इस मामले पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मनसे पर निशाना साधते हुए कहा कि समाज में दरार पैदा करने और हर बात में बेवजह राजनीति घसीटने से वोट नहीं मिलता है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jun 15, 2026

MNS on Jain White Line

जैन समाज की सफेद पट्टियों पर मनसे नेता संदीप देशपांडे का बड़ा बयान (Photo: X/@prasadvedpathak)

MNS on Jain Community: मुंबई के कई इलाकों में जैन समुदाय द्वारा सड़कों पर बनाई गई सफेद पट्टियों को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने कड़ा विरोध जताया है। मनसे के मुंबई अध्यक्ष संदीप देशपांडे ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सफेद पट्टियां सड़क को ठंडा रखती हैं, तो क्या यह विज्ञान जैन समाज को इतने वर्षों से पता नहीं था? अचानक इस विज्ञान का जन्म कैसे हो गया?

क्या है सफेद पट्टियों का विवाद?

बताया जा रहा है कि जैन धर्मगुरु परंपरा के अनुसार नंगे पैर चलते हैं। मुंबई में गर्मी के कारण तपती सड़क पर चलने में परेशानी कम हो, इसलिए उनके मार्ग पर सफेद रंग की पट्टियां बनाई गई। हालांकि, मनसे ने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सार्वजनिक सड़कों पर बिना अनुमति ऐसे पट्टियां बनाना ‘सांस्कृतिक आतंकवाद’ है।

यह विवाद तब चर्चा में आया जब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रसाद वेदपाठक ने जैन धर्मगुरुओं और साध्वियों के चलने के लिए सड़कों पर बनाई गई इन सफेद पट्टियों का विरोध किया। इसके बाद पूरे विवाद में राज ठाकरे की पार्टी मनसे की एंट्री हुई। तभी से यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।

'पूरी सड़क पर सफेद पट्टियां क्यों नहीं बनाते'

एक इंटरव्यू में मनसे नेता संदीप देशपांडे ने कहा कि यदि सफेद पट्टियों से सड़क ठंडी रहती है, तो फिर पूरे शहर की सड़कों पर ऐसी पट्टियां क्यों नहीं बनाई जातीं? उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म और विज्ञान के नाम पर सांस्कृतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

देशपांडे ने कहा कि यह केवल सड़क पर पट्टियां बनाने का मामला नहीं है, बल्कि यह मराठी लोगों की मुंबई और बाहरी लोगों के बीच का संघर्ष है। यह मुंबई की पहचान और स्थानीय संस्कृति से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग मुंबई पर अपना वर्चस्व स्थापित करने की मानसिकता रखते हैं और इसी सोच के खिलाफ यह लड़ाई लड़ी जा रही है।

'सांस्कृतिक दहशतवाद' का लगाया आरोप

मनसे नेता ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग मुंबई पर अपने तौर-तरीके थोपने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाषा, खानपान और सामाजिक व्यवहार को लेकर दबाव बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। देशपांडे ने इसे सांस्कृतिक आतंकवाद करार देते हुए कहा कि मनसे ऐसे किसी भी प्रयास का मुंहतोड़ जवाब देगी।

जैन समाज का पलटवार

संदीप देशपांडे के बयानों के बाद जैन समाज के नेताओं ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जैन मुनि निलेशचंद्र विजय और जैन समाज के नेता कुणाल जैन ने कहा कि मराठी और जैन समाज वर्षों से सौहार्द और भाईचारे के साथ मुंबई में रहते आए हैं, लेकिन कुछ राजनीतिक नेता अपने राजनीतिक हितों के लिए दोनों के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

जैन मुनि निलेशचंद्र ने कहा कि जैन समाज ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं, समय आने पर जवाब दिया जाएगा। लेकिन उन्होंने जैन समाज से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सफेद रंग शांति का प्रतीक होता है। उन्होंने मनसे नेता को भिवंडी जाने की चुनौती दी और कहा कि वहां चारों ओर सिर्फ हरा रंग दिखाई देता है।

‘जैन समाज के युवा चुप नहीं बैठेंगे’

कुणाल जैन ने कहा कि जैन समाज अहिंसा, शांति और सह-अस्तित्व में विश्वास रखता है। यदि किसी स्थानीय मुद्दे पर आपत्ति है तो उस पर चर्चा हो सकती है, लेकिन पूरे जैन समाज को निशाना बनाकर उसे धार्मिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि संदीप देशपांडे लगातार जैन धर्म, जैन पर्वों और साधु-संतों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां करते रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जैन समाज के युवा अब चुप नहीं बैठेंगे और इसका जवाब दिया जाएगा।

सीएम ने दी नसीहत- इससे वोट नहीं मिलने वाला

इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने मनसे का नाम लिए बिना कहा कि समाज में दरार पैदा करने और हर बात में बेवजह राजनीति घसीटने से किसी भी दल को कोई सियासी लाभ नहीं होगा। इससे वोट नहीं मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि यदि किसी समाज की कोई परंपरा है तो उसे निभाने का अधिकार है, लेकिन साथ ही अन्य समाजों की भावनाओं और सार्वजनिक नियमों का भी सम्मान किया जाना चाहिए। हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान एक-दूसरे की परंपराओं और भावनाओं का सम्मान करना है।