
श्रीनगर। मोदी सरकार ने नव वर्ष के दूसरे सप्ताह के पहले दिन यानी सोमवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की। इसके बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गया। कोई भी सियासी दल खुलकर सरकार के इस फैसले का विरोध नहीं कर पा रही है। लेकिन अब विरोध जताने का एक नया तरीका अपनाया है। विरोध के इस कड़ी में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि मोदी सरकार का यह फैसला एक चुनावी जुमला है। इसके अलावा उन्होंने घाटी में बढ़ रहे आतंकवाद के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
बेरोजगार युवक ही उठा रहे हैं बंदूक: अब्दुल्ला
आपको बता दें कि उमर अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस के यूथ कन्वेंशन में बोलते हुए अपनी सीमा को भी लांघ गए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि घाटी में युवाओं के पास रोजगार नहीं है, इसलिए वे बंदूक उठाने रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास न तो कोई नजरिया है न ही कोई रास्ता। अब युवाओं को इस संकटपूर्ण स्थिति से बाहर निकालने के लिए हमें विचार करना होगा। बता दें कि अब्दुल्ला ने पूर्व की भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब घाटी में भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार की तो युवाओं के लिए कुछ भी नहीं किया और अब केंद्र सरकार की नीतियों से युवा परेशान है। अब्दुल्ला ने कहा कि उनके सरकार के कार्यकाल मे भी इतनी आतंकवादी घटनाएं नहीं हुई जितनी की भाजपा-पीडीपी सरकार के दौरान हुई।
'आरक्षण पर मोदी सरकार के इरादे नेक नहीं'
आपको बता दें कि उमर अब्दुल्ला ने बोलते हुए मोदी सरकार के सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने के फैसले पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को साढ़े चार वर्ष में यह याद नहीं आया लेकिन अब जब आम चुनाव नजदीक है तो युवाओं को भ्रमाने के लिए आरक्षण देने की बात कह रही है। अब्दुल्ला ने कहा कि इससे यही प्रतीत होता है कि भाजपा और सरकार के इरादे नेक नहीं है।
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