मध्‍य प्रदेश की एक रैली में कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने डोकलाम पर तनातनी के बावजूद पटेल की मूर्ति बनाने में चीनी भागीदारी पर आपत्ति जताई थी।
नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से स्टेच्यू ऑफ यूनिटी की चर्चा जोरों पर है। आज पटेल की इस प्रतिमा का पीएम मोदी अनावरण करेंगे। लेकिन इस बात को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि मेक इन इंडिया पर जोर देने वाली मोदी सरकार ने पटेल की प्रतिमा बनवाने में डोकलाम पर चीन से तकरार के बावजूद उसका सहयोग क्यों लिया? हालांकि इसको लेकर इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाली कंपनी लार्सन एंड ट्रूबो के अपने तर्क हैं। जानकारों का कहना है कि इस काम में विदेशी सहयोग सरकार की मेक इन इंडिया नीति के विपरीत है।
चीनी कंपनी का चयन क्यों?
इस बारे में आईई की रिपोर्ट में बताया गया है कि एल एंड टी ने कांस्य प्रतिमा के क्लैडिंग मोल्डिंग के लिए चीनी कंपनी का सहयोग देने की सिफारिश की थी। एक अधिकारी ने कहा कि भारत में किसी भी फाउंड्री में एक कांस्य प्रतिमा को स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के रूप में लंबा करने की विशेषज्ञता नहीं है। इसके अलावा चीनी फाउंड्री जियांग्शी टॉंगकिंग मेटल हैंडीक्राफ्ट इस काम के लिए दुनिया भर में चर्चित है। इस फर्म को कास्य प्रतिमा के क्लैडिंग की विधा में तेजी से काम करने का अनुभव है। कंपनी को इस परियोजना को 31 अक्टूबर, 2018 की समय सीमा में पूरा करने के लिए यह काम दिया गया था।
मेक इन इंडिया पर उठाए सवाल
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के सतना में एक रैली में लोगों को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी यह कहते रहे हैं कि हम गुजरात में सरदार पटेल की मूर्ति स्थापित करेंगे। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लौह पुरुष की मूर्ति मेड इन चाइना है। उन्होंने मोदी से सवाल पूछा कि अगर चीन से ही बनवाना था तो फिर आपने मेक इन इंडिया का ढोल पीटकर लोगों को गुमराह क्यों किया। इस बात के लिए उन्होंने पीएम मोदी और भाजपा की सख्त आलोचना की थी। उन्होंने पीएम मोदी पर हमलावर रुख अख्तियार करते हुए कहा कि वो मतदाताओं, जाति, समाज, समुदाय और सरकार को बनाए रखने के लिए महान व्यतित्वों अपने हित में राजनीतिक उपयोग करना बंद करे। इसके बावजूद पीएम मोदी 24 घंटे यही काम करते हैं।