राहुल गांधी ने पीएम से सवाल पूछा है कि जिस कंपनी में 40 फीसदी हिस्सा सरकारी कंपनियों का है, उस पर 91 हजार करोड़ का कर्ज कैसे चढ़ गया?
नई दिल्ली। रफाल सौदे में घोटाले का आरोप लगाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर एक नया आरोप लगा दिया है। यह आरोप 70,000 करोड़ रुपए के एक प्रोजेक्ट में जालसाजी की है। यह आरोप उन्होंने पूरी तरह से फिल्मी अंदाज में लगाया है।
91,000 करोड़ का कर्ज कैसे चढ़ा
फिल्मी अंदाज में लाइट्स, कैमरा और स्कैम की बात करते हुए उन्होंने मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान के एक प्रोजेक्ट का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में जालसाजी हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएल एंड एफएस) कंपनी को साल 2007 में बतौर सीएम 70 हजार करोड़ का गिफ्ट सिटी नाम का प्रोजेक्ट दिया। लेकिन इस प्रोजेक्ट के तहत कोई काम नहीं हुआ, बल्कि इसमें जालसाजियां सामने आईं। जबकि आईएल एंड एफएस में 40 फीसदी हिस्सा एलआईसी, एसबीआई और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसी सरकारी संस्थाओं का है। राहुल ने पीएम से सवाल पूछा है कि जिस कंपनी में 40 फीसदी हिस्सा सरकारी कंपनियों का है, उस पर 91 हजार करोड़ का कर्ज कैसे चढ़ गया? कांग्रेस ने यह भी बताया कि 91 हजार करोड़ में से 67 करोड़ एनपीए हो चुका है।
बेलआउट की योजना
अब इस कंपनी और विदेशी कपंनियों के निवेश को बचाने के लिए पीएमओ और वित्त मंत्रालय रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक, एलआईसी और एनएचएआई पर दबाव डाल रहे हैं ताकि वो इस कंपनी को बेलआउट कर सकें। कंपनी का 35 फीसदी हिस्सा विदेशी कंपनियों का है। इसलिए बेलआउट करने की कोशिश की जा रही है। ताकि विदेश कंपनियों का पैसा न डूबे। उन्होंने इस बात का भी आरोप लगाया है कि मोदी सरकार भारतीय करदाताओं के पैसे से विदेशी कंपनियों की मदद की कोशिश में लगे हैं।
राइट्स इश्यू लाने का ऐलान
देश भर में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्त-पोषण कारोबार में लगी आईएल एंड एफएस को अपने मौजूदा शेयरधारकों एलआईसी, ओरिक्स कॉर्प और एसबीआई की ओर से बड़ी राहत मिली है। तीन कंपनियों ने शनिवार को आईएलएंडएफएस के प्रस्तावित 4,500 करोड़ रुपए के राइट्स इश्यू को खरीदने का ऐलान किया है। आपको बता दें कि मार्च 2018 तक इस कंपनी में एलआईसी की 25.34 फीसदी, ओरिक्स कॉर्पोरेशन की 23.54 फीसदी, अबू धाबी इंवेस्टमेंट अथॉरिटी की 12.56 फीसदी, एचडीएफसी बैंक की 9.02 फीसदी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की 7.67 फीसदी और एसबीआई की 6.42 फीसदी हिस्सेदारी है।
कंपनी किश्त चुकाने मे नाकाम
आपको बता दें कि इंफ्रास्ट्रचर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसिस लिमिटेड एक सरकारी क्षेत्र की कंपनी है जिस पर लगभग 91,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। इसमें 60 फीसदी निजी हिस्सेदारी है और 40 फीसदी सरकारी बैंकों और एलआईसी का है। हाल ही में पता चला कि कंपनी लिए गए कर्ज का लगातार तीसरा किश्त चुकाने में नाकाम रही है।