
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में भले ही लालू यादव को आज भी लोग गंभीरता से न लेते हों, लेकिन उनके छोटे बेटे तेस्जवी यादव अपनी छवि लेकर अभी से गंभीरता का परिचय देने लगे हैं। इसका परिचय वह एनआरसी के मुद्दे पर भी दे भी रहे हैं। एक तरफ एनआरसी को लेकर देश भर में सियासी भूचाल की स्थिति है, लेकिन तेजस्वी ने चौथे दिन अपने बयान में कहा कि इस मुद्दे पर वह कोई भी बयान देने को लेकर जल्दबाजी में नहीं है। पहले एनआरसी के सभी प्रावधानों का अध्ययन करूंगा उसके बाद पार्टी की तरफ से आधिकारिक बयन दूंगा।
मानवता सबसे ऊपर
फिलहाल उन्होंने इतना जरूर कहा है कि मेरे लिए मानवता सबसे ऊपर की चीज है। मानवता से बड़ा कुछ भी नहीं हो सकता। उन्होंने सभी सियासी दलों से अपील की है कि जरा सोचिए बाहर रहने वाले अनिवासी भारतीयों के साथ ऐसा हो तो आपको कैसा लगेगा। इसी तरह जो लोग दशकों भारत में रहते आए हैं उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए बगैर अगर आप उन्हें बाहर जाने को कहेंगे तो वो कहां जाएंगे। जब आप ही उन्हें जगह नहीं देंगे तो कोई और उन्हें जगह क्यों देगा। इसलिए सरकार को चाहिए कि वो इस मुद्दे पर मानवीय पहलुओं पर भी गौर फरमाए।
एसओपी तैयार करने में जुटी है सरकार
एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट जारी होने के बाद अब केंद्र सरकार इस रणनीति पर काम करने में जुटी है कि जिन 40 लाख घुसपैठियों को अवैध करार दिया गया है उनका क्या किया जाए। इस बात पर सरकार एसओपी तैयार करने में जुटी है। जानकारी के मुताबिक सरकार इस प्रक्रिया में उन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने का मन बना रही हे जो एनआरसी के प्रकाशन के बाद उत्पन्न हुई है। सरकार उसी के अनुरूप कार्रवाई की रूपरेखा तय कर सकती है। पीठ ने केंद्र से इसके तौर-तरीके और एसओपी 16 अगस्त तक मंजूरी के लिए उसे सौंपने को कहा है।
भारत कोई धर्मशाला नहीं
इससे पहले बुधवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुबह्मण्यम स्वामी ने एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है कि यहां पर कोई भी किसी भी देश से आकर बस जाए। अभी तो असम में एनआरसी लागू हुआ है। अगर हमारी सरकार पश्चिम बंगाल में आएगी तो हम वहां पर भी एनआरसी लागू करेंगे।