राजनीति

सीलिंग विवाद सुलझाने के लिए ‘आप’ भूख हड़ताल नहीं करेगी, सुप्रीम कोर्ट में रखेगी पक्ष

आप ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट पर दबाव नहीं बनाना चाहते, इसलिए वह भूख हड़ताल नहीं करेंगे, बल्कि कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे।
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Updated: 31 Mar 2018, 8:04 PM IST
aravind kejriwal

नई दिल्‍ली : दो हफ्ते से भी ज्‍यादा समय से दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री कह रहे थे कि वह सीलिंग के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठेंगे, लेकिन अब वह पलट गए हैं। इस कारण वह विरोधियों और व्यापारियों के निशाने पर आ गए हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी के विधायक और ट्रेड विंग के नेताओं ने इस पर सफाई दी है।
इस पर सफाई देते हुए आम आदमी पार्टी के कस्तूरबा नगर से विधायक मदन लाल का कहना है कि 2 अप्रैल से सीलिंग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। ऐसे में अगर 2 अप्रैल से भूख हड़ताल पर जाने को दबाव बनाने की रणनीति माना जा सकता है और हमें दबाव नहीं बनाना, बल्कि पक्ष सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखना है। आज भूख हड़ताल का कोई औचित्य नहीं है। व्‍यापारियों के साथ कोई विश्वासघात नहीं हुआ है। कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक किसी ने सीलिंग से राहत के लिए कुछ नहीं किया और आम आदमी पार्टी के हाथ में कुछ नहीं है। भूख हड़ताल आगे भी कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल भूख हड़ताल से समाधान नहीं निकलेगा।

भाजपा से बिल लाने की मांग की
आप नेता ने इसके अलावा भाजपा से यह भी मांग की कि वह ऐसा बिल लाए, ताकि एक साल या उससे ज्यादा वक्त के लिए व्‍यापारियों को सीलिंग से राहत मिले। बीजेपी ऐसी पॉलिसी बनाए, जिससे सीलिंग जैसे मामले का समाधान निकले और इसका फायदा व्यापारियों को मिले।

अच्‍छे से अच्‍छा वकील करेंगे
मदन लाल ने कहा कि फिलहाल भूख हड़ताल से ज्‍यादा जरूरी है कि अच्छे से अच्छा वकील सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त कर राहत ढूंढ़ा जाए। भूख हड़ताल की घोषणा पर उन्‍होंने कहा कि उस समय की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और 2 अप्रैल को शुरू होने वाली सुनवाई में बहुत अंतर है। उस समय मॉनिटरिंग कमेटी को आदेश थे कि जहां-जहां गैरकानूनी अतिक्रमण हो वहां एक्शन लिया जाए।

कांग्रेस भी है सीलिंग के लिए जिम्‍मेदार
आम आदमी पार्टी के नेता ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि सीलिंग के लिए असल जिम्मेदार कांग्रेस है। उन्‍होंने कहा कि सीलिंग का सिलसिला जब 2006 में शुरू हुआ, तब राज्‍य और केंद्र दोनों जगह कांग्रेस की सरकार थी। तब कांग्रेस ले एक अध्यादेश लाकर सीलिंग से एक साल का राहत दिया था और उसने वादा किया था कि एक साल के दौरान ऐसी पॉलिसी बनाई जाएगी, जिससे सीलिंग या अन्य कार्रवाइयों से व्यापारियों को बचाया जा सके। लेकिन 2007 से 2014 तक राज्य या केंद्र की सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने इसके लिए कुछ भी नहीं किया।

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