शिवसेना प्रमुख ने पत्रकार वार्ता के दौरान किया खुलासा। उद्धव ठाकरे का दावा, भाजपा कर रही है संपर्क। महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू होने से गहराया संकट। शिवसेना ने लिया कांग्रेस-एनसीपी के साथ जाने का फैसला।
मुंबई। एक ओर महाराष्ट्र में मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लागू हो गया, तो दूसरी ओर इसके बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई। कांग्रेस-एनसीपी की पत्रकार वार्ता के बाद शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए अनाधिकारिक माध्यमों से अभी भी संपर्क कर रही है।
ठाकरे ने कहा, "वे हर बार अस्पष्ट और अलग-अलग प्रस्ताव दे रहे हैं। लेकिन हमने कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ जाने का निर्णय लिया है।"
इसके थोड़ी ही देर बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने उद्धव के बयान की एक तरह से पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें सरकार गठन के लिए भाजपा संग गठबंधन को फिर से जिंदा करने पर शिवसेना को समझाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए लगा रखा है।
राणे ने कहा, "हम 145 सदस्यों के एक सामान्य बहुमत की कोशिश में लगे हुए हैं, हमारा यही लक्ष्य है और हम राज्यपाल को उसे सौंपेंगे। मुझे नहीं लगता कि शिवसेना राकांपा-कांग्रेस के साथ जाएगी। वे शिवसेना को मोहरा बना रहे हैं।"
ठाकरे ने राकांपा अध्यक्ष शरद पवार के उस बयान का जिक्र करते हुए भाजपा पर हमला बोला, जिसमें उन्होंने कहा कि शिवसेना ने औपचारिक रूप से पहली बार सोमवार को उनसे (कांग्रेस-राकांपा) संपर्क किया।
उद्धव ने कहा, "वे हमारे ऊपर भाजपा को छोड़कर हर किसी से पहले से ही बात करने आरोप लगा रहे हैं। लेकिन अब सच्चाई सामने आ गई है। हमारे पास बातचीत का समय था, लेकिन मैं इस दिशा में नहीं जाना चाहता था, जिस दिशा में चर्चा हो रही है।"
उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल बीएस कोश्यारी ने किस तरह उन्हें दो दिन का समय नहीं दिया, लेकिन अब उन्होंने दूसरे दलों को समर्थन पत्र के लिए छह महीने (राष्ट्रपति शासन) का समय दे दिया।
ठाकरे ने भाजपा की चुटकी पर चुटकी लेते हुए कहा, "जब से उन्होंने हमें शुभकामनाएं दी हैं, लगता है यह हमें दिशा दिखा रहा है। हम उन्हें निराश नहीं करेंगे।"
कांग्रेस-राकांपा के साथ वैचारिक मतभेदों के सवाल पर ठाकरे ने भाजपा द्वारा विपरीत विचारधारा की पार्टियों से किए गए गठबंधन पर सवाल उठा दिया, जिसमें नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, चंद्रबाबू नायडू और अन्य शामिल हैं।