
केंद्र की मोदी सरकार अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने की तैयारी कर रही है। इस बात का संकेत खुद प्रधानमंत्री मोदी दे चुके हैं। देश में जैसे ही UCC को लेकर चर्चा शुरू हुई। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने आज बैठक बुलाई और इस पर चर्चा किया। इसके साथ ही बोर्ड ने यह भी तय कर दिया कि वह UCC के मुद्दे पर चुप बैठने वाली नहीं है। बोर्ड इस बिल का पूरा देश में विरोध करेगा।
बोर्ड को बिल नामंजूर
आज ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की एक बैठक हुई। इस बैठक के बाद AIMPLB के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में बोर्ड के सभी लोग शामिल थे। मीटिंग में UCC को लेकर चर्चा की गई। देश में सभी को अपने हिसाब से अपने धार्मिक कानून बनाने के अधिकार है। हम एक सेक्युलर मुल्क में रहते है। देश की सरकार मुसलमानों को परेशान करने के नियत से यह बिल ला रही है। बोर्ड इस बिल का पूरी तरह से विरोध करता है।
देश को UCC की जरूरत नहीं
इस दौरान मीडिया से बात करते हुए महली ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड की मुल्क में कोई जरूरत नहीं है। इसका मसला सिर्फ मुस्लिम का नहीं बल्कि कई और कम्यूनिटीज का है। पांच साल पहले भी इस पर चर्चा हुई थी। तब 21वें लॉ कमीशन ने कहा था कि मुल्क को इसकी जरूरत नहीं है। आम लोग भी इस पर अपनी राय दे रहे हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी एक लेटर जारी किया है। इसमे लोगों से उनकी राय मांगी गई है और कहा गया है कि UCC का सभी लोग विरोध करें।
PM मोदी हिंदू सिविल कोड' लाना चाहते हैं- ओवैसी
वहीं, UCC के मुद्दे को लेकर AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पहले दिन से मोदी सरकार के ऊपर हमलावर हैं। ओवैसी ने तो मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि यूसीसी के नाम पर प्रधानमंत्री मोदी 'हिंदू सिविल कोड' लाना चाहते हैं, जिसका हम पुरजोर विरोध करते हैं। प्रधानमंत्री कहा तो समानता की बात करते हैं, लेकिन हकीकत में वे इससे कोसों दूर हैं। मेरे देश के प्रधानमंत्री को कोई जाकर समझाए कि समानता और अनेकता अलग-अलग चीज है।