2 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

लोकसभा में फिर आया परिसीमन बिल तो क्या होगा? कांग्रेस ने साफ किया अपना रुख

Manickam Tagore Delimitation Bill: कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने परिसीमन बिल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार यदि बिल को दोबारा लोकसभा में लाती है, तो तमिलनाडु और पुडुचेरी के कांग्रेस सांसद इसके खिलाफ मतदान करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि प्रस्तावित परिसीमन से तमिलनाडु का राजनीतिक प्रतिनिधित्व और राज्य के हित प्रभावित होंगे।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Ashib Khan

Aug 02, 2026

Congress on Delimitation Bill

सदन में परिसीमन बिल के विरोध में मतदान करेगी कांग्रेस (Photo-IANS)

Delimitation Bill: देश में एक बार फिर परिसीमन बिल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस ने भी अपना रूख स्पष्ट कर दिया है। रविवार को सांसद मणिकम टैगोर ने परिसीमन बिल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर मोदी सरकार इस बिल को दोबारा लोकसभा में लाती है, तो तमिलनाडु और पुडुचेरी से पार्टी के सभी सांसद इसके विरोध में मतदान करेंगे। उन्होंने कहा कि यह बिल तमिलनाडु के हितों और राज्य की जनता की आवाज के खिलाफ है।

सभी सांसद बिल के खिलाफ करेंगे मतदान

उन्होंने आगे कहा कि परिसीमन तमिलनाडु के लोगों की आवाज के खिलाफ है। मैं उन सांसदों में से एक हूं जो स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि मैं परिसीमन के खिलाफ वोट करूंगा। पुडुचेरी समेत लोकसभा में कांग्रेस के 10 सांसद इसके खिलाफ मतदान करेंगे।

बता दें कि कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर का यह बयान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की उस प्रतिक्रिया के बाद आया है। इससे पहले राहुल गांधी ने परिसीमन विधेयक का समर्थन करने वालों पर निशाना साथा था। उन्होंने कहा था कि प्रस्तावित परिसीमन की प्रक्रिया तमिलनाडु के लोगों को राजनीतिक रूप से कमजोर करने और राज्य के प्रतिनिधित्व को कम करने की साजिश है।

अप्रैल में लोकसभा में गिर चुका है विधेयक

बता दें कि परिसीमन बिल को 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। प्रस्तावित कानून में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने और नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत महिला आरक्षण को लागू करने का प्रावधान था।

लोकसभा में विधेयक को 528 सदस्यों के उपस्थित होकर मतदान करने की स्थिति में 352 मतों की जरूरत थी, लेकिन इसके पक्ष में केवल 298 वोट पड़े। आवश्यक बहुमत नहीं मिलने के कारण विधेयक पर सरकार को झटका लगा और यह पारित नहीं हो सका।

इसके बाद लगातार विपक्षी दलों के सांसद एनडीए में शामिल हुए। जिसमें टीएमसी के 20 सांसद भी शामिल है। इसके बाद अटकलें लगाई जा रही थी इस मानसून सत्र में मोदी सरकार एक बार फिर सदन में परिसीमन बिल को ला सकती है। हालांकि सत्र शुरू होने से पहले सरकार ने स्पष्ट किया कि वह इस बार यह बिल सदन में नहीं लाएगी। माना जा रहा है कि सदन में अभी भी दो-तिहाई बहुमत नहीं होने के कारण यह विधेयक को दोबारा नहीं लाया गया है।