राजनीति

विधान परिषद चुनाव: यूपी और बिहार में दिलचस्प होगा मुकाबला

बीजेपी यूपी में राज्यसभा चुनाव फार्मूले की तर्ज पर अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है। वहीं बिहार में मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं।
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niitish akhilesh

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने 2 अप्रैल को बिहार और उत्तर प्रदेश के विधानपरिषद चुनावों का ऐलान कर दिया है। दोनों राज्यों में विधानपरिषद के लिए चुनाव 26 अप्रैल को होगा।

रोचक मुकाबले के आसार

आने वाले विधान परिषद चुनावों में उत्तर प्रदेश और बिहार में राज्य सभा की तरह दिलचस्प मुकाबले के आसार हैं। 5 मई को सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। अखिलेश यादव के साथ ही नरेश चंद्र उत्तम, उमर अली खान, मधु गुप्ता, राजेंद्र चौधरी, राम सकल गुर्जर, विजय यादव, अंबिका चौधरी, बसपा के विजय प्रताप और सुनील कुमार चित्तौड़, रालोद के चौधरी मुश्ताक तथा प्रदेश सरकार के मंत्री महेंद्र सिंह व मोहसिन रजा का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। उधर बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का राज्य विधानपरिषद के सदस्य के तौर पर कार्यकाल भी छह मई को समाप्त होने वाला है।

यह है चुनावी गणित

राज्यसभा और लोकसभा उपचुनाव के बाद अब विधान परिषद के चुनाव में भी समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी गठबंधन का असर दिख सकता है। राज्यसभा चुनाव में हालांकि गठबंधन की लाख कोशिशों के बावजूद बीजेपी ने बीएसपी उम्मीदवार को हरा दिया था। उत्तर प्रदेश में एक उम्मीदवार की जीत के लिए 29 मत की जरूरत होगी और इस समय उत्तर प्रदेश की स्थिति में सबसे ज्यादा भारतीय जनता पार्टी मजबूत है।

उत्तर प्रदेश के विपक्षी दलों में समाजवादी पार्टी के 47, बीएसपी के सात, कांग्रेस के 3 विधायक हैं। आरएलडी और निषाद पार्टी राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन से हटकर वोट करने वाले अपने इकलौते विधायक को निलंबित कर चुकी है। दोनों दलों के विधायक ने राज्यसभा चुनाव में बीजेपी को वोट किया था।

उत्तर प्रदेश में खाली हो रही सीटों में से एक पर अखिलेश यादव और बिहार में खाली हो रही सीटों में से नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी सदस्य हैं। अब देखने वाली बात यह है कि रिटायर हो रहे इन वरिष्ठ नेताओं में किस-किस की वापसी विधान परिषद में दोबारा होती है।

Published on:
03 Apr 2018 11:26 am