दिगंबर जैन मुनि पुण्य सागर 19 पिच्छी ससंघ का सोमवार को धरियावद नगर में बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों के बीच मंगल प्रवेश हुआ। दिगंबर मुनि पुण्य सागर करीबन 21 साल बाद धरियावद नगर प्रवेश को ऐतिहासिक बनाया गया।
धरियावद. दिगंबर जैन मुनि पुण्य सागर 19 पिच्छी ससंघ का सोमवार को धरियावद नगर में बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों के बीच मंगल प्रवेश हुआ। दिगंबर मुनि पुण्य सागर करीबन 21 साल बाद धरियावद नगर प्रवेश को ऐतिहासिक बनाया गया। जिसके तहत रेनिया मंगरी से चंद्रप्रभु मंदिर प्रांगण कार्यक्रम स्थल तक करीबन 3 किमी तक मंगल प्रवेश शोभायात्रा में कई लोग उमड़े। यहां मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रावकों के साथ विभिन्न संगठनों एवं राजनेतिक दल ने भी मुनि की अगवानी करते हुए प्रवेश को भव्य बनाया। मंगल प्रवेश जुलूस में नगर के सकल जैन समाज सहित आसपास के ग्रामों से समाज प्रमुख प्रतिनिधियों ने शामिल होकर मुनि पुण्य सागर के जयकारे के साथ मुनि ससंघ की अगवानी की। जगह-जगह पुष्यवर्षा के साथ श्रावकों ने मुनि की अगवानी करते हुए जयकारा लगाए। नगर मंगल प्रवेश के साथ ही दिगंबर मुनि के सानिध्य में कार्यक्रम स्थल चंद्रप्रभु मंदिर प्रांगण में सात दिवसीय सिद्ध चक्र महामंडल विधान की भी शुरुआत हुई। बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी एवं प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन के निर्देशन में चंद्र प्रभु मंदिर में श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान पूजन किया गया। ध्वजारोहण, धर्मसभा में गुरु पाद प्रक्षालन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, जिनवाणी भेंट, प्रवचन सभा सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित हुए।
मुनि के किए पाद प्रक्षालन
यहां प्रथम दिन विविध आयोजन हुए। इससे पूर्व सोमवार अल सुबह क्षेत्र के महू अतिशय क्षेत्र से विहार कर मुनि संघ रेनिया मगरी पहुंचा। जहां रेनिया के समीप एक ऊंचे मंच पर मुनि का पाद प्रक्षालन किया गया। इसके बाद रेनिया मंगरी से मंगल प्रवेश जुलूस की शुरुआत हुई। जो विभिन्न मार्गों से होते हुए चंद्रप्रभु मंदिर प्रांगण कार्यक्रम स्थल पहुंचा।
मंगल प्रवेश में शामिल हुए कई इलाकों से श्रावक
मंगल प्रवेश में कई इलाकों से श्रावक शामिल हुए। आगे पंचरंगी ध्वज लिए युवा के साथ घुड़ सवार, उनके पीछे स्कूटी पर महिला मंडल चल रही थी। पीछे महिलाएं जुलूस में ढोल, मंजीरा, लेजियम, झंडा, डांडिया, ताशे, आदि वाद्य यंत्र के साथ महिला मंडल नाचते गाते चल रही थी। बच्चों के ग्रुप भी शामिल थे जो वाद्य यंत्रों के साथ नाचते गा रहे थे। उनके पीछे 2 घोड़ा बग्गी में लाभार्थी परिवार बैठा हुआ था। शोभायात्रा जुलूस के अंत में मुनि पुण्य सागर महाराज संघ के साथ सकल दिगंबर समाज सहित जैन समाज के सेठ प्रमुख अध्यक्ष एवं प्रतिनिधि साथ चल रहे थे। विभिन्न संगठनों की ओर से जगह-जगह सत्कार किया गया। चंद्रप्रभु मंदिर प्रांगण में मुनि के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन व विशाल जैन के निर्देशन में सात दिवसीय सिद्ध चक्र महामंडल विधान कार्यक्रम की शुरुआत हुई।