
रमजान का दूसरा असरा शुरु
प्रतापगढ़ . नवतपा की भीषण गर्मीऔर रोजा यकिनन ईश्वर की ओर से रोजदारों के लिए इससे बेहतर कसौटी नहीं हो सकती है। जिससे कि वे अपने खुदा को अपने हक में राजी करें।
रमज़ान को तीन भागों में बांटा जाता है। 10 दिन के पहले भाग को रहमतों का दौर बताया गया है। दूसरे 10 दिन के भाग को माफी का दौर कहा जाता है और आखिरी 10 दिन के भाग को जहन्नुम (नरक) के बचाने का दौर बोला जाता है।
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इसी गर्मी के साथ रमजान माह का पहला असरा पूरा हो गया। जिसमें अल्लाह के नेक बंदों ने भूख-प्यास को काबू में रख अपने रब से रहमतों की इल्तिजा की। यकिनन पहला असरा रहमतों की बारिश करने वाला था। पहले असरा एक से लेकर दसवें रमजान तक जारी रहता है। जिसमें अल्लाह तआला अपने बंदों पर रहमतों की बारिश करता है। इस असरे में मोमिन जितना अपने हक में चाहे उतना मांग सकता है। वैसे भी रमजानुल मुबारक में एक नेकी के बदले में सत्तर गुना अधिक सवाब मिलता है।
दूसरा असरा शुरु मगफेरत के लिए होगी दुआ
रमजान माह तीन असरों में विभाजित है। पहला असरा रहमतों का है तो दूसरा असरा मगफेरत का इस असरे में बंदे अपने रब से गुनाहों की तौबा मांगते है। अपने गुनाहों की माफी के तलबगार होते हैं। इस असरे में सालभर में किए गए जाने अनजाने गुनाहों की तौबा की जाती है। माफी देने वाला केवल मौला है। बंदे का काम है अपने गुनाहों की माफी तलब करना ।
बुरी सौहबतों से करें तौबा
रमजान के दौरान रोजेदारों को बुरी सौहबतों से दूर रहना चाहिए, उन्हें न तो झूठ बोलना चाहिए, न पीठ पीछे किसी की बुराई (गीबत)करनी चाहिए और न ही लड़ाई झगड़ा करना चाहिए। इस्लामिक पैगंबरों के मुताबिक ऐसा करने से अल्लाह की रहमत मिलती है।
हाफीज जाफर खान
शहर काजी प्रतापगढ़
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सवा सात हजार घरों में चिमनी से रोशनी
जिले में आज भी कई परिवार रह रहे अंधेरे में
प्रतापगढ़
प्रतापगढ़ जिले के आदिवासी इलाकों में आज भी कई घरों में रात को चिमनी से रोशनी होती है। ऐसे में इन घरों में बिजली पहुंचाने की आवश्यकता है। हालांकि बिजली के वंचित घरों में कनेक्शन के लिए निगम की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन पहाड़ी भाग और जंगल होने से यहां कनेक्शन पहुंचाने में परेशानी हो रही है। जिले में अभी 7 हजार 235 परिवारों में कनेक्शन नहीं हुए है।
यह है जिले में स्थिति
जिले में कुल 1003 गांव है। जिसमें 1025 ढाणियां हैं। कुल मिलाकर 2028 गांव-ढाणियां है। विद्युत वितरण निगम की ओर से सभी गांव-ढाणियों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है। इनमें से 17 गांव-ढाणियों में गत वर्ष तक बिजली नहीं थी। इनकी बसावट जंगल में होने से यहां लाइन नहीं बिछाई जा सकती थी। इस पर सरकार की ओर से इनमें सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए हैं। इससे यहां भी बिजली की व्यवस्था हो गई।
निगम के दीनदयाल विद्युतीकरण योजना के कनिष्ठ अभियंता बीएल पाटीदार ने बताया कि जिले में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कुल एक लाख 78 हजार 726 परिवार है। इन परिवारों में कुल 8 लाख 68 हजार 231 लोग निवासरत है। इनमें से 7235 परिवारों में अभी कनेक्शन नहीं हुए है।
सीतामाता अभयारण्य में सौर ऊर्जा से रोशनी
जंगल में जहां बिजली की लाइनें पहुंचाई जाना संभव नहीं थी। वहां पर निगम ने सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर बिजली पहुंचाई। पाल और अन्य गांवों में कुल मिलाकर 14 गांव-ढाणियों में 2204 परिवारोंं के घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए।
कर रहे है प्रयास
जिले में अधिकांश गांव-ढाणियां पहाड़ी क्षेत्रों में हंै।ऐसे में यहां कनेक्शन पहुंचाने में काफी परेशानी हो रही है। दीनदयाल विद्युतीकृत योजना में हम इनमें बिजली पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए अभी कार्य चल रहा है।
आई आर मीणा
अधीक्षण अभियंता, अविविनिलि, प्रतापगढ़
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