प्रतापगढ़

Nainital Land Case: राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह की 0.5206 हेक्टेयर भूमि सरकार में निहित

नैनीताल में भूमि उपयोग नियमों पर बड़ी कार्रवाई: राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह की 0.5206 हेक्टेयर भूमि सरकार में निहित, कई अन्य मामलों में भी डीएम कोर्ट सख्त

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राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह की 0.5206 हेक्टेयर भूमि सरकार में निहित, कई अन्य मामलों में भी डीएम कोर्ट सख्त    (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह की 0.5206 हेक्टेयर भूमि सरकार में निहित, कई अन्य मामलों में भी डीएम कोर्ट सख्त    (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Nainital DM Court: उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भूमि उपयोग एवं भू-सुधार कानूनों के उल्लंघन के मामलों पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई भूखंडों को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश जारी किए हैं। जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल की कोर्ट द्वारा पारित इन आदेशों को भूमि उपयोग नियमों के सख्त अनुपालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि कृषि एवं बागवानी प्रयोजनों के लिए आवंटित अथवा खरीदी गई भूमि का निर्धारित उद्देश्य के विपरीत उपयोग किए जाने पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

इन मामलों में सबसे अधिक चर्चा पूर्व मंत्री और उत्तर प्रदेश के कुंडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह से जुड़े प्रकरण की रही। लंबे समय से विचाराधीन इस मामले में डीएम कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई और विभागीय रिपोर्टों के आधार पर महत्वपूर्ण आदेश पारित किए हैं।

दो दशक पुराना है भूमि खरीद का मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग दो दशक पूर्व नैनीताल जिले की कैंची धाम तहसील के अंतर्गत स्थित सिल्टोना गांव में भानवी सिंह द्वारा बागवानी प्रयोजन के लिए भूमि क्रय की गई थी। भूमि खरीद के समय उसका उद्देश्य उद्यान एवं फल उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देना बताया गया था। राज्य के भूमि कानूनों के अनुसार, इस प्रकार की भूमि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जा सकता है।

समय-समय पर प्राप्त शिकायतों और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया। इसके बाद प्रशासन ने भूमि की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराने का निर्णय लिया। जांच प्रक्रिया के दौरान राजस्व विभाग और उद्यान विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण किया और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।

निरीक्षण में सामने आई वास्तविक स्थिति

जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि भूमि के एक हिस्से में नाशपाती के वृक्ष मौजूद हैं। निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार कुल 27 नाशपाती के पेड़ पाए गए। साथ ही इन पेड़ों तक पहुंच के लिए लगभग छह फीट चौड़ा मार्ग भी सुरक्षित रखा गया था। मामले की सुनवाई के दौरान डीएम कोर्ट ने उद्यान विभाग से यह भी रिपोर्ट तलब की कि हॉर्टिकल्चर टेक्नोलॉजी मिशन के मानकों के अनुसार एक हेक्टेयर क्षेत्र में कितने फलदार वृक्ष लगाए जा सकते हैं। विभाग द्वारा प्रस्तुत तकनीकी रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कोर्ट ने भूमि की आवश्यकता और वास्तविक उपयोग का मूल्यांकन किया।

रिपोर्टों के आधार पर न्यायालय ने निर्णय दिया कि 0.0344 हेक्टेयर भूमि, जिस पर फलदार वृक्ष और आवश्यक पहुंच मार्ग मौजूद है, उसे भानवी सिंह के पक्ष में यथावत रखा जाए। हालांकि शेष 0.5206 हेक्टेयर भूमि को निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग नहीं किए जाने के आधार पर राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश दिए गए।

कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से हुई थीं पेश

मामले की सुनवाई के दौरान भानवी सिंह स्वयं भी कोर्ट में उपस्थित हुई थीं। उन्होंने अपने पक्ष में विभिन्न तर्क और दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। प्रशासनिक और तकनीकी रिपोर्टों पर विचार करने के बाद ही अंतिम आदेश जारी किए गए।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि भानवी सिंह और उनके पति राजा भैया के बीच पिछले कुछ वर्षों से पारिवारिक और कानूनी विवाद चल रहा है। विवाह के लगभग 28 वर्ष बाद दोनों के बीच तलाक और घरेलू हिंसा से जुड़े मामले न्यायालयों में विचाराधीन हैं। यह विवाद देश की सर्वोच्च अदालत तक भी पहुंच चुका है। हालांकि भूमि संबंधी मामला पूरी तरह राजस्व एवं भूमि उपयोग कानूनों से जुड़ा हुआ है और इसका वैवाहिक विवाद से प्रत्यक्ष संबंध नहीं माना जा रहा।

भूमि उपयोग नियमों के अनुपालन पर प्रशासन का जोर

जिला प्रशासन का कहना है कि उत्तराखंड में भूमि उपयोग संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि, बागवानी और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए भूमि खरीद एवं उपयोग के लिए स्पष्ट प्रावधान बनाए गए हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या संस्था निर्धारित उद्देश्य के विपरीत भूमि का उपयोग करती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है। हाल के वर्षों में ऐसे कई मामलों की समीक्षा की गई है, जिनमें भूमि उपयोग परिवर्तन की शर्तों का उल्लंघन पाया गया।

कैंची धाम क्षेत्र में भी हुई कार्रवाई

डीएम कोर्ट ने केवल भानवी सिंह से जुड़े मामले में ही नहीं, बल्कि अन्य प्रकरणों में भी सख्त रुख अपनाया है। कैंची धाम क्षेत्र के ग्राम छड़ा, पट्टी मझेड़ा निवासी आनंद सिंह और राजेंद्र सिंह के मामले में भी कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं।

जानकारी के अनुसार दोनों को कृषि कार्यों के लिए पट्टे पर भूमि आवंटित की गई थी। लेकिन जांच में पाया गया कि भूमि पर कृषि गतिविधियों के स्थान पर आवासीय मकान और दुकान का निर्माण कर दिया गया था। यह भूमि आवंटन की मूल शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया। मामले की सुनवाई के बाद डीएम कोर्ट ने 0.033 हेक्टेयर भूमि का पट्टा निरस्त कर दिया और उसे राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश जारी कर दिए। प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई भविष्य में नियमों के उल्लंघन को रोकने में प्रभावी साबित होगी।

3572 वर्ग मीटर भूमि पर भी सरकार का अधिकार

भूमि उपयोग परिवर्तन की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने के एक अन्य मामले में जिला प्रशासन ने 3572 वर्ग मीटर भूमि को भी राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने का आदेश दिया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार संबंधित भूमि का उपयोग निर्धारित नियमों और स्वीकृत शर्तों के विपरीत किया जा रहा था। जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों की समीक्षा जारी रहेगी और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

भूमि कानूनों के पालन का स्पष्ट संदेश

नैनीताल प्रशासन की हालिया कार्रवाई को राज्य में भूमि प्रबंधन और राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि सीमित संसाधन है, इसलिए उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप होना आवश्यक है।

डीएम कोर्ट के इन आदेशों से यह स्पष्ट संदेश गया है कि कृषि, बागवानी या अन्य विशेष प्रयोजनों के लिए खरीदी अथवा आवंटित भूमि का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर भूमि उपयोग सुनिश्चित करना सभी भूमि स्वामियों की जिम्मेदारी है। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद भूमि उपयोग से जुड़े अन्य मामलों पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में ऐसे मामलों की जांच और तेज हो सकती है तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।