
Six Family Members Dead: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में मानसून की मूसलाधार बारिश ने एक भयानक त्रासदी का रूप ले लिया है। नगर कोतवाली क्षेत्र के माहूली इलाके में तड़के एक 100 साल पुराना जर्जर दोमंजिला मकान अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस दर्दनाक हादसे में सो रहे एक ही परिवार के 6 सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ा दी है।
हादसा रात के लगभग 2 बजे का है, जब पूरा माहूली इलाका गहरी नींद में सोया हुआ था। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण करीब एक सदी पुराना यह जर्जर मकान सह नहीं पाया और ऊपरी मंजिल की छत सीधे निचली मंजिल पर जा गिरी।
पड़ोसियों के अनुसार, एक जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई और चारों तरफ धूल का गुबार फैल गया। घर के भीतर मौजूद 7 लोग मलबे के नीचे दब गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और तुरंत पुलिस व फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई।
सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा का बयान: "रात करीब 2 बजे कोतवाली पुलिस को माहूली में मकान गिरने की सूचना मिली थी। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। मलबे से सभी 7 लोगों को निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने 6 लोगों को मृत घोषित कर दिया।"
पड़ोस में रहने वाली पूनम श्रीवास्तव ने नम आंखों से बताया कि बारिश तेज थी और परिवार बेखबर सो रहा था। अचानक दोमंजिला मकान का ढांचा ढह गया और पूरी छत नीचे आ गिरी।
इस दिल दहला देने वाले हादसे में मासूम बच्चों समेत परिवार के 6 चिराग बुझ गए:
परिवार के एक सदस्य को कड़ी मशक्कत के बाद मलबे से जिंदा बाहर निकाला गया, जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।
प्रतापगढ़ और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में हर साल मानसून के दौरान जर्जर मकानों और पुरानी दीवारों के गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। मानसून से पहले नगर निकायों द्वारा जर्जर भवनों को चिह्नित कर उन्हें खाली कराने या गिराने का नोटिस जारी करने का नियम है।
लेकिन धरातल पर समय रहते सख्त कार्रवाई न होने के कारण अक्सर ऐसे हादसे तबाही मचाते हैं। बारिश के इस सीजन में पुरानी और कमजोर बुनियाद वाले मकान आम जनता के लिए मौत का फंदा बनते जा रहे हैं।