प्रयागराज

पति पर अवैध संबंध का आरोप लगाना मानसिक क्रूरता, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

वाराणसी के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। पत्नी द्वारा पति के चरित्र पर झूठे आरोप और बच्चों को छोड़ने को मानसिक क्रूरता माना गया।
2 min read
• •
Updated: 8 Feb 2026, 7:37 AM IST
Feature image
High Court प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

Allahabad High Court Granted husband Permission for divorce: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति के चरित्र पर बिना सबूत कीचड़ उछालना मानसिक क्रूरता है। बिना प्रमाण के अवैध संबंध का आरोप लगाना पति की सामाजिक और मानसिक हत्या के समान है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की बेंच ने पति की तलाक की याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने कहा कि अगर पति ने सालों तक कोई शिकायत नहीं की तो इसका मतलब यह नहीं कि वह प्रताड़ित नहीं था। भारतीय समाज में पुरुष अक्सर इज्जत और बच्चों के भविष्य के डर से ऐसी नर्क जैसी जिंदगी सहते हैं।

शादी और अलगाव की कहानी

यह मामला वाराणसी का है। गुरुग्राम में एक निजी कंपनी में उप प्रबंधक के पद पर काम करने वाले व्यक्ति की शादी 25 नवंबर 2003 को वाराणसी में एक टीचर से हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। उनके दो बेटे हैं। 2011 से दोनों पति-पत्नी अलग रहने लगे, क्योंकि उनके बीच शक की दीवार खड़ी हो गई। बच्चों का पालन-पोषण दादा-दादी कर रहे हैं।

पति के आरोप: क्रूरता के कई उदाहरण

2014 में पति ने परिवार न्यायालय में तलाक की अर्जी दी। उसने कहा कि पत्नी का स्वभाव बहुत झगड़ालू और शक्की है। वह बार-बार पति पर भाभी के साथ अवैध संबंध का आरोप लगाती थी। पत्नी ने बच्चों और सास-ससुर के साथ भी क्रूर व्यवहार किया। पति ने 2009 की एक घटना बताई कि पत्नी ने सिर्फ चार महीने के छोटे बेटे को छत से लटका दिया था। वहीं बूढ़ी सास पर गर्म दाल फेंक दी। पत्नी धमकी देती थी कि वह सुसाइड नोट लिखकर पति और परिवार को जेल भिजवा देगी। पति ने वॉइस रिकॉर्डिंग भी सबूत के तौर पर पेश की, जिसमें अपमानजनक बातें कही गई थीं।

परिवार न्यायालय ने याचिका खारिज की

परिवार न्यायालय ने पति की अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि पति ने पत्नी के व्यवहार को माफ कर दिया है, क्योंकि उसने सालों तक कोई शिकायत नहीं की और नोटिस भी नहीं भेजा। पति ने हाईकोर्ट में अपील की। वहां पता चला कि पत्नी ने खुद कोर्ट में स्वीकार किया था कि पति का भाभी के साथ अवैध संबंध है। इस बात से पति गहरे अवसाद में चला गया और आत्महत्या के कगार पर पहुंच गया। बाद में पत्नी ने दोनों बच्चों को छोड़कर वाराणसी में अलग किराए के कमरे में रहना शुरू कर दिया। पति द्वारा भेजा गया नोटिस भी पत्नी ने लेने से मना कर दिया।

कोर्ट का अंतिम फैसला

हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई मां अपने बच्चों को सालों तक छोड़ दे और पति के चरित्र पर कीचड़ उछाले, तो शादी सिर्फ कागजी रह जाती है, उसका दिल और रूह नहीं बचता। ऐसी हालत में तलाक ही एकमात्र रास्ता है। इस तरह कोर्ट ने पति को तलाक देने का आदेश दिया।

Updated on:
8 Feb 2026, 7:37 AM IST
Published on:
Also Read
View All
शिक्षा निदेशालय में घुसे TGT-PGT अभ्यर्थी: प्रयागराज में 4 लेयर की बैरिकेडिंग तोड़ी, जमकर हंगामा

स्वराज भवन पहुंचीं आराधना मिश्रा मोना, बोलीं- हर कांग्रेसी के लिए मंदिर के समान है यह स्थान; सामाजिक न्याय पर भी दिया जोर

‘2027 के चुनाव में सपा हो जाएगी चारों खाने चित्त’, केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना, कहा- भाजपा 2047 तक सत्ता में रहेगी

माफिया अतीक के गढ़ कसारी-मसारी का बदला नाम: सीएम योगी ने किया ‘श्रीकृष्ण पुरी’ करने का ऐलान

यूपी पुलिस सिपाही भर्ती का रिजल्ट घोषित, 32,679 पदों पर अभ्यर्थियों की सूची जारी, uppbpb.gov.in पर देखें रिजल्ट