प्रयागराज

अब सीधे नहीं गिरेगा घर! बुलडोजर चलाने से पहले देना होगा नोटिस, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि निजी संपत्ति पर बुलडोजर या ध्वस्तीकरण से पहले कानूनी प्रक्रिया और नोटिस देना अनिवार्य है।

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संपत्ति पर कार्रवाई से पहले जरूरी होगा नोटिस!

Prayagraj News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नागरिक अधिकारों की रक्षा करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन किसी भी व्यक्ति की निजी संपत्ति पर बुलडोजर चलाने या निर्माण गिराने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के लिए बाध्य है। बिना नोटिस और सुनवाई के की गई कोई भी कार्रवाई अवैध मानी जाएगी। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने गोपाल कृष्ण व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए।

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बिना नोटिस कार्रवाई पर रोक

हाई कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि किसी भी निजी जमीन पर बने निर्माण को गिराने से पहले संबंधित व्यक्ति को 'कारण बताओ नोटिस' देना अनिवार्य है। केवल नोटिस देना ही काफी नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति को अपनी बात रखने और सुनवाई का पूरा अवसर भी मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि भले ही विकास प्राधिकरण को मास्टर प्लान के उल्लंघन पर कार्रवाई का हक है, लेकिन वे कानून से ऊपर नहीं हैं।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद मुख्य रूप से जमीन की पैमाइश और सीमा विवाद से जुड़ा था। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक:

प्लाट संख्या 27: यह 'नवीन परती' यानी सरकारी भूमि घोषित है।

प्लाट संख्या 28: यह एक निजी स्वामित्व वाली भूमि है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि प्रशासन उनकी निजी संपत्ति पर अवैध रूप से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर रहा है। वहीं, प्रयागराज विकास प्राधिकरण का तर्क था कि कार्रवाई केवल उसी निर्माण पर की गई जो स्वीकृत नक्शे या योजना के अनुरूप नहीं था।

सरकारी बनाम निजी भूमि पर नियम

कोर्ट ने दोनों स्थितियों में फर्क स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकारी भूमि (प्लाट 27): यदि सरकारी जमीन पर कोई अतिक्रमण किया गया है, तो उसे नियमानुसार हटाया जा सकता है। निजी भूमि (प्लाट 28): यदि जमीन निजी है, तो वहां किसी भी तोड़फोड़ से पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों और प्राकृतिक न्याय के नियमों का पालन करना होगा।

निजी विवाद के लिए सिविल कोर्ट का रास्ता

हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि दो पक्षों के बीच जमीन की सीमा या मालिकाना हक को लेकर कोई निजी झगड़ा है, तो उन्हें सक्षम सिविल कोर्ट जाना चाहिए। प्रशासन को ऐसे मामलों में जल्दबाजी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

न्यायालय ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि भविष्य में किसी भी निजी निर्माण पर कार्रवाई से पहले विधिवत नोटिस जारी किया जाए। यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो बिना पूर्व सूचना के प्रशासनिक कार्रवाई का डर महसूस करते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया कि 'कानून का राज' प्रक्रिया के पालन में ही निहित है।

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Published on:
24 Apr 2026 01:21 pm
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