
नए लेबर लॉ से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा? Image Source: Tentative
New Labor Laws Update: उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में नई श्रम व्यवस्था को लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत 29 पुराने और जटिल कानूनों को समाप्त कर उन्हें चार नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) में बदल दिया गया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना और उद्योगों के लिए नियमों को सरल बनाना है।
नई नियमावली में 'वेतन' की परिभाषा बदल दी गई है। अब किसी भी कर्मचारी का मूल वेतन (Basic Pay) उसकी कुल सैलरी (CTC) का कम से कम 50% होना अनिवार्य होगा।
पहली बार सभी क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य कर दिया गया है।
केंद्र सरकार एक 'फ्लोर वेज' (न्यूनतम आधार) तय करेगी, जिससे कम वेतन कोई भी राज्य निर्धारित नहीं कर पाएगा।
समान कार्य, समान वेतन: लिंग, जाति या धर्म के आधार पर वेतन में कोई भेदभाव नहीं होगा।
सभी कर्मचारियों को अब लिखित नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) देना अनिवार्य होगा।
नई संहिताओं में काम के घंटों और स्वास्थ्य को लेकर भी स्पष्ट नियम हैं:
पहली बार ऑनलाइन डिलीवरी बॉय और ऐप आधारित काम करने वाले 'गिग वर्कर्स' को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है।
कंपनियों को अपने सालाना टर्नओवर का 1-2% हिस्सा सामाजिक सुरक्षा फंड में देना होगा।
ड्यूटी पर आते-जाते समय होने वाली दुर्घटना को भी अब 'कार्य के दौरान हुई दुर्घटना' माना जाएगा।
एमएसएमई (MSME) सेक्टर को राहत देते हुए नियमों को लचीला बनाया गया है कि छंटनी: अब 300 से अधिक श्रमिकों वाले कारखानों को ही छंटनी या बंदी के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी (पहले यह सीमा 100 थी)। हड़ताल: किसी भी हड़ताल पर जाने से 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी होगा। जुर्माना: नियमों के उल्लंघन पर 20 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है, लेकिन छोटी गलतियों पर पहले सुधार का मौका दिया जाएगा।
इन नियमों का म ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया गया है। जनता और विशेषज्ञों से मिले सुझावों के बाद, मई 2026 तक इन अंतिम नियमों को अधिसूचित कर लागू कर दिया जाएगा। इससे प्रदेश में रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे और श्रमिकों का जीवन स्तर बेहतर होगा।
Published on:
24 Apr 2026 10:14 am
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