प्रयागराज

कानूनी फाइलें गुम करने वाले क्लर्क पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, कहा- यह गंभीर अपराध

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक फाइल गुम होने को गंभीर अपराध बताते हुए रामपुर के एक कोर्ट क्लर्क की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता ने कहा कि रिकॉर्ड का गायब होना न्याय प्रशासन पर सीधा हमला है और ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती।
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Updated: 22 Apr 2026, 6:31 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायपालिका के रिकॉर्ड से फाइल गुम होने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ऐसे गंभीर आरोपों से न्याय प्रशासन पर सीधा असर पड़ता है, इसलिए इनसे बहुत सख्ती से निपटने की जरूरत है। कोर्ट ने रामपुर जिले के एक कोर्ट क्लर्क की रिट याचिका खारिज कर दी और उसके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को पूरी तरह सही ठहराया।

जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने 3 अप्रैल 2026 को दिए गए आदेश में स्पष्ट कहा, 'न्यायपालिका के रिकॉर्ड से किसी न्यायिक फाइल का गुम होना या खो जाना बहुत गंभीर आरोप है। इसका असर न्याय प्रशासन पर पड़ता है और इससे बहुत सख्ती से निपटने की जरूरत है।'

रामपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के दफ्तर से एक शिकायत संबंधी महत्वपूर्ण न्यायिक फाइल गायब हो गई। बार-बार मौके दिए जाने के बावजूद जब फाइल नहीं मिली, तो विभागीय जांच शुरू की गई। जांच में उस समय डीलिंग क्लर्क रहे याचिकाकर्ता को फाइल गुम होने का जिम्मेदार ठहराया गया।

याचिकाकर्ता पर उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के तहत कदाचार का आरोप सिद्ध हुआ। सुनवाई का पूरा मौका देने के बाद अनुशासनात्मक अधिकारी ने उसे चार सालाना वेतन वृद्धियों (इंक्रीमेंट्स) को संचयी प्रभाव (cumulative effect) से रोकने का आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता की विभागीय अपील भी अपीलीय अधिकारी ने खारिज कर दी। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।

याचिकाकर्ता की दलीलें

  • दफ्तर में काम का बंटवारा सख्ती से नहीं होता था।
  • फाइल गुम होने की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर तय नहीं की जा सकती।
  • जांच अधिकारी ने बिना असली जिम्मेदार का पता लगाए उसे दोषी ठहरा दिया।

कोर्ट का फैसला और टिप्पणी

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि अनुशासनात्मक कार्यवाही के दौरान पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था और याचिकाकर्ता को सुनवाई का पर्याप्त मौका दिया गया था।

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सेवा मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत सीमित होता है। अनुशासनात्मक प्राधिकारी और अपीलीय अधिकारी द्वारा पारित आदेशों में कोई गैर-कानूनी, अनुचित या खामियों से भरा तथ्य नहीं पाया गया।

कोर्ट ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता ने सजा को अपने अपराध के अनुपात में ज्यादा बताने का कोई ठोस आधार भी नहीं दिया। इसलिए कोर्ट को इन आदेशों में दखल देने की जरूरत नहीं है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता ने लिखा कि न्यायिक फाइल गुम होना सिर्फ एक साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा हमला है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि अन्य कर्मचारी भी सतर्क रहें।

अंत में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की रिट याचिका खारिज कर दी और रामपुर जिला न्यायपालिका द्वारा पारित अनुशासनात्मक आदेश को बरकरार रखा। यह फैसला न्यायिक रिकॉर्ड की सुरक्षा और कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर हाईकोर्ट की सख्त सोच को साफ तौर पर दर्शाता है।

Updated on:
22 Apr 2026, 6:31 PM IST
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