प्रयागराज

बाहुबली मुख्तार अंसारी ने अवधेश राय हत्याकांड में ट्रायल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट से रोक लगाने की मांग

हत्याकांड से जुड़े सारे रिकॉर्ड प्रयागराज जिला अदालत आ गए थे। मुख्तार के मामले में ट्रायल अब शुरू हुआ है। सारे रिकॉर्ड छायाप्रति लगाई गई है। वाराणसी ट्रायल कोर्ट से गुहार लगाई गई कि प्रयागराज जिला अदालत से मूलप्रति मंगाई जाए। जब मूलप्रति मंगाई गई तो वह नहीं मिली। उसकी जगह पर छायाप्रति ही मिली है। वाराणसी ट्रायल कोर्ट ने छायाप्रति के आधार पर ही ट्रायल शुरू कर दिया। हाईकोर्ट में निगरानी याचिका के जरिए उसे ही चुनौती दिया गया है।
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Updated: 19 Jul 2022, 6:00 PM IST
बाहुबली मुख्तार अंसारी ने अवधेश राय हत्याकांड में ट्रायल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट से रोक लगाने की मांग
बाहुबली मुख्तार अंसारी ने अवधेश राय हत्याकांड में ट्रायल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट से रोक लगाने की मांग

प्रयागराज: वाराणसी में अवधेश राय हत्याकांड के मुख्य आरोपी बाहुबली मुख्तार अंसारी ने साक्ष्यों के मूलपत्रों की बजाय छायाप्रति के आधार पर ट्रायल चलाने पर आपत्ति उठाई है। वाराणसी सत्र न्यायालय के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देकर ट्रायल पर रोक लगाने की मांग की है। मुख्तार अंसारी ने वाराणसी सत्र न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है। उसका कहना है कि मूल दस्तावेज उपलब्ध होने पर छायाप्रति साक्ष्य के तौर पर ग्राह्य नहीं है। लिहाजा, मूलप्रति दाखिल होने पर ही ट्रायल शुरू किया जाए।

हत्याकांड के सहआरोपी राकेश श्रीवास्तव ने अपने मामले की सुनवाई वाराणसी जिला अदालत से प्रयागराज जिला अदालत स्थानांतरण करा ली थी। इसलिए हत्याकांड से जुड़े सारे रिकॉर्ड प्रयागराज जिला अदालत आ गए थे। मुख्तार के मामले में ट्रायल अब शुरू हुआ है। सारे रिकॉर्ड छायाप्रति लगाई गई है। वाराणसी ट्रायल कोर्ट से गुहार लगाई गई कि प्रयागराज जिला अदालत से मूलप्रति मंगाई जाए। जब मूलप्रति मंगाई गई तो वह नहीं मिली। उसकी जगह पर छायाप्रति ही मिली है। वाराणसी ट्रायल कोर्ट ने छायाप्रति के आधार पर ही ट्रायल शुरू कर दिया। हाईकोर्ट में निगरानी याचिका के जरिए उसे ही चुनौती दिया गया है।

यह भी पढ़ें: इलाहाबाद हाईकोर्ट: सीआरपीसी की धारा 82 और 83 के तहत उद्घोषणा की जाती है तो अग्रिम जमानत अर्जी है सुनवाई योग्य मामले में जमानत आवेदक ने अप्रैल 2022 में निचली अदालत के समक्ष एक अग्रिम जमानत आवेदन दायर किया था और इसे 30 अप्रैल 2022 को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद, उद्घोषणा सीआऱपीसी की धारा 82 के तहत निचली अदालत ने 9 मई, 2022 यानी उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद जारी किया था।

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