‘छंदबद्ध भारत का संविधान’ एक अनोखी कृति है जिसमें पूरे भारतीय संविधान को दोहा, रोला और विभिन्न छंदों में प्रस्तुत किया गया है।
Indian Constitution News: भारत का संविधान अब कठिन किताब की बजाय गीत और छंदों में गाया जा सकेगा। पहली बार पूरे भारतीय संविधान को दोहा, रोला और अलग-अलग छंदों में पिरोया गया है। अब इसे रामचरितमानस की तरह आसानी से पढ़ा, समझा और याद किया जा सकेगा।
इस महान कार्य में भारत समेत नेपाल, इंडोनेशिया, सिंगापुर और कुवैत के कुल 142 रचनाकारों ने भाग लिया। इन्होंने मिलकर संविधान को काव्य रूप दिया। इस पुस्तक को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है। यह पुस्तक ‘छंदबद्ध भारत का संविधान’ नाम से प्रकाशित हुई है। इसमें संविधान के मूल भाव को बिना बदले सरल, सुंदर और मधुर भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
इस रचना की शुरुआत 26 नवंबर 2022 को हुई और ठीक एक साल बाद 26 नवंबर 2023 को इसे पूरा किया गया। यह तारीख इसलिए भी खास है क्योंकि संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया था।
इस पुस्तक को बनाने में 14 वर्ष के छोटे बालक से लेकर 81 वर्ष की वरिष्ठ लेखिका तक शामिल हुईं। कुल 92 महिलाएँ और 48 पुरुष ने इसमें योगदान दिया। इनमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध धर्म के लोग शामिल हैं। यह अनेकता में एकता का सुंदर उदाहरण है।
इस कृति को ‘फर्स्ट पोएट्री बुक ऑन कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया’ नाम से गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। मुख्य संपादक डॉ. ओमकार साहू ‘मृदुल’, सह-संपादक डॉ. मधु शंखधर ‘स्वतंत्र’ और डॉ. सपना दत्ता ‘सुहासिनी’ हैं। 29 अक्टूबर 2023 को इस पुस्तक को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया। यह भारत का पहला संविधान-आधारित काव्य ग्रंथ माना जा रहा है।
अब इस छंदबद्ध संविधान को गीत के रूप में रिकॉर्ड करने की तैयारी चल रही है। इसका उद्देश्य है कि आम आदमी, स्कूली बच्चे और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र आसानी से संविधान को समझ सकें और याद रख सकें।