
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फरारी काट रहे आरोपियों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि अपराध करने के बाद फरारी काटने वाले आरोपी अग्रिम जमानत के हकदार नहीं है। ऐसे ही मामले में सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक नाबालिग लड़की और उसकी मां के साथ कथित रूप से बलात्कार करने वाले आरोपी (पॉक्सो) को अग्रिम जमानत से इंकार कर दिया। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपी सीआरपीसी की धारा 82 के तहत भगोड़ा घोषित कर दिया गया तो वह अग्रिम जमानत का हकदार नहीं होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई करते हुए मामले में यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने प्रेम शंकर प्रसाद की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह देखा गया कि यदि किसी को सीआरपीसी की धारा 82 के तहत भगोड़ा अपराधी घोषित किया गया है तो वह अग्रिम जमानत की राहत पाने का हकदार नहीं है। मामले में सुनवाई करते हुए याची ने प्रयागराज की विशेष न्यायाधीश पॉक्सो ने अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया है। इस पर याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
शादी के लिए तैयार न होने पर लगाया झूठा आरोप
मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 506, 328, पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उस पर एक नाबालिग लड़की और उसकी मां शिकायतकर्ता के साथ कथित रूप से बलात्कार करने का आरोप लगाया गया है। आरोपी के मामले के अनुसार उसके और शिकायतकर्ता के बीच सहमति से संबंध थे। जबकि आरोपी एक विवाहित व्यक्ति है और शिकायतकर्ता अपने पति से अलग रह रही है।