
Abbas Ansari Brijbhushan Singh And Raja Bhaiya latest News: उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों, माफियाओं और उनके करीबी लोगों द्वारा बड़ी संख्या में लाइसेंसी हथियार रखने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप लगाया जा रहा है कि कई प्रभावशाली लोगों ने सिर्फ सुरक्षा के नाम पर नहीं, बल्कि इलाके में अपना दबदबा और दहशत कायम रखने के लिए हथियारों का जखीरा तैयार कर रखा है। यही वजह है कि अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कई चर्चित नेताओं और बाहुबलियों की आपराधिक कुंडली तलब कर ली है।
हाईकोर्ट ने जिन नामों को लेकर जानकारी मांगी है, उनमें अब्बास अंसारी, बृजभूषण सिंह और राजा भैया जैसे बड़े राजनीतिक चेहरे भी शामिल हैं। कोर्ट के इस कदम के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी हलचल तेज हो गई है।
प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में इस समय 10 लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस जारी हैं। इनमें से 6062 ऐसे लाइसेंसधारी हैं, जिन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। यानी गंभीर मामलों में नाम आने के बावजूद इन लोगों के पास वैध हथियार मौजूद हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कई बाहुबली और उनके रिश्तेदार खुद को “जान का खतरा” बताकर लाइसेंसी हथियार हासिल करते हैं। हालांकि वास्तविकता में इन हथियारों का इस्तेमाल अक्सर शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने के लिए किया जाता है।
करीब 2 साल पहले एक विधायक के रिश्तेदार से जुड़ा मामला भी सामने आया था, जिसमें नागालैंड से फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनवाने का आरोप लगा था। जांच में यह भी सामने आया कि बाद में उस लाइसेंस को मुख्तार अंसारी के लखनऊ स्थित पते पर संदिग्ध तरीके से ट्रांसफर कराया गया।
इस मामले की जांच STF ने की थी, लेकिन प्रशासन की ओर से जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके चलते जांच गहराई तक नहीं पहुंच सकी। बाद में STF ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी। माना जा रहा है कि ऐसे कई और मामले अभी भी फाइलों में दबे पड़े हैं।
कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में लाइसेंसी हथियारों के साथ शस्त्र पूजा की जा रही थी। वीडियो में कई राइफलें, पिस्टल और अन्य हथियार दिखाई दिए थे। जांच के दौरान पता चला था कि वीडियो में दिख रहे कई हथियार बाहुबलियों, उनके रिश्तेदारों और करीबी लोगों के नाम पर जारी लाइसेंस वाले थे। इस घटना ने प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल खड़े किए थे कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर हथियारों का संग्रह कैसे हो रहा है।
वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद शस्त्र लाइसेंस नियमावली में बड़े बदलाव किए गए थे। उस समय प्रदेश में 12.50 लाख से अधिक लाइसेंसी हथियार थे। नई नीति लागू होने के बाद जिन लोगों के पास दो से अधिक हथियार थे, उनसे अतिरिक्त हथियार जमा कराए गए। सरकार ने कई लाइसेंस निरस्त भी किए थे। बताया जाता है कि रद्द किए गए लाइसेंसों में लगभग 500 लाइसेंस माफिया, बाहुबली, उनके रिश्तेदारों और करीबियों से जुड़े थे। इसके बावजूद प्रदेश में हथियारों के नेटवर्क को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं।
अब हाईकोर्ट द्वारा सख्त टिप्पणी और आपराधिक कुंडली तलब किए जाने के बाद प्रशासन ने एक बार फिर लाइसेंसी हथियारों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन लोगों ने नियमों का गलत इस्तेमाल कर हथियार हासिल किए और क्या उनका इस्तेमाल प्रभाव जमाने या अपराध में किया जा रहा है।